मथुरा। कभी सरस्वती की धारा से पल्लवित सरस्वती कुंड आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है। अपनी पहचान खो रहे सरस्वती जी का मंदिर, कुंड को श्रीजी बाबा ट्रस्ट ने जीर्णोद्धार की संजीवनी दी है।
पुराणों में वर्णित ब्रज में सरस्वती नदी के प्रवाह का साक्षात गवाह है सरस्वती कुंड। अंबिका वन (वर्तमान में महाविद्या क्षेत्र) होकर गुजरने वाली सरस्वती नदी की धारा और जल स्रोत से ही सरस्वती कुंड भी पल्लवित होता था। ये कुंड, यहां स्थित सरस्वती मां का मंदिर जीर्णशीर्ण हालत में था। इस पौराणिक स्थल को सहेजने का जिम्मा उठाया श्रीजी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट ने उठाया। ट्रस्ट का संचालन कर रहे सचिव रमाकांत गोस्वामी ने बताया कुंड को उसका प्राचीन स्वरूप लौटाने के लिये वो विगत कई सालों से प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही इसकी खोदाई कराकर कुंड का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा जीर्णशीर्ण हालत में सरस्वती के मंदिर का भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा। ताकि इस पौराणिक स्थल पर पहुंच कर लोग ब्रज की प्राचीन संस्कृति का अनुभव कर सकें।
पुराणों में वर्णित है सरस्वती नदी अंबिका वन (वर्तमान में महाविद्या क्षेत्र) से होकर गोकर्ण नाथ महादेव निकट से गुजरते हुए यमुना से मिलती थी। सरस्वती कुंड क्षेत्र महाविद्या और गोकर्ण नाथ महादेव के मध्य स्थित है। ऐसे में सरस्वती की धारा से इस कुंड के पल्लवित होने की धारणा बनती है।
वैष्णवाआचार्य, ब्रज के पौराणिक स्थलों में अध्ययनरत।