मथुरा। किशोरी और उसकी मां को जिस तरह से घेरकर गोलियों से भूना, यह अंदाज पेशेवर अपराधियों जैसा है। माना जा रहा है कि इस घटना को पेशेवर अपराधियों ने अंजाम दिया है। घटना से इलाके में दहशत फैल गई। घटना के पीछे की अदावत भी किसी उलझी पहेली से कम नहीं है।
अपहरण और दुराचार के दो मामले दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ दर्ज कराए थे। कौन पीड़ित और कौन आरोपी, हमेशा पुलिस उलझन में फंसी रही और बाद में दुराचार के मामले में खारिज कर दिया था। पीड़ित किशोरी और उसका परिवार कार्रवाई के लिए भटकता रहा। अब उसकी हत्या के बाद पुलिस को पहले दर्ज हुए दोनों की तह तक भी पहुंचना होगा। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो टीमें बनाई है।
अदावत की शुरूआत
मथुरा। दो साल पहले वृंदावन के संत गोविंदानंद तीर्थ का अपहरण हुआ था। उनका ही एक कर्मचारी उन्हें अगवा कर झुंझनू
राजस्थान में अपने रिश्तेदारों के यहां ले गया। यहां गोविंदानंद तीर्थ से लाखों नकदी लिखे चेकों पर जबरन दस्तखत कराए। नौ जनवरी को गोविंदानंद तीर्थ मुक्त हुए और रिपोर्ट दर्ज कराई। 14 लोग नामजद हुए और दो को पुलिस ने बैंक से रकम निकालते हुए गिरफ्तार किया।
संत पर लगे आरोप
वृंदावन निवासी संत गोविंदानंद तीर्थ पर किशोरी को बंगलूरू में ले जा कर दुराचार करने का आरोप लगा और किशोरी की मां ने एसएसपी व वृंदावन पुलिस को तहरीर दी थी। पुलिस ने जब रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो परिवार कोर्ट में पहुंच गया। कोर्ट के आदेश पर दुराचार, छेड़खानी व बुरी नीयत से देखने की रिपोर्ट वृंदावन कोतवाली में दर्ज हुई थी। वृंदावन पुलिस ने इस मामले को जांच में खारिज कर दिया और इसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी। महिला ने कोर्ट से पुन: सुनवाई के लिए अर्जी लगाई थी। इसमें कोर्ट ने मां बेटी को बयान देने के लिए बुलाया था। दोनों कोर्ट जाने के लिए निकली, तभी उनकी हत्या कर दी गई।
-हत्यारों को पकड़ने को तीन टीमें गठित
मथुरा। पूजा की गोली मारकर हत्या कर देने व उसकी मां विजया देवी को घायल कर देने के मामले में एसएसपी गुलाब सिंह ने बताया कि यमुनापार, वृंदावन व सीओ वृंदावन आईपीए अजयपाल के नेतृत्व में तीन टीम काम कर रही है। कुछ जगह इस मामले में दबिश भी दी गई है।
दिनेश शर्मा