गोवर्धन। जतीपुरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जिस प्रकार वर-वधू सात फेरे लगाकर शादी के बंधन में बंध जाते हैं ठीक उसी प्रकार सप्तकोसी परिक्रमा लगाने के बाद भक्त श्रीकृष्ण के प्रेम में बंध जाते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं परम आनंद देने वाली हैं और प्राणी मात्र के कल्याण के लिए हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने जितने भी असुरों का वध किया सभी को परम गति प्रदान कर सांसारिक मोह-माया से मुक्त कर दिया।
उन्होंने कहा कि कन्हैया बड़े ही दयालु हैं, जो उनसे शत्रुता करता है उसका भी कल्याण और जो भक्ति करता है उसका भी कल्याण करते हैं। द्वापर में यमुना को प्रदूषित करने के लिए एक कालिया नाग था लेकिन आज असंख्य कालिया नाग हैं। इस अवसर पर भागवत मंच पर गिर्राज जी का भव्य छप्पन भोग लगाया गया। अतुल कृष्ण गोस्वामी, बिहारी लाल वशिष्ठ, हरदेव शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा आदि उपस्थित रहे।