नौहझील। क्षेत्र के एक क्लिनिक में पिछले पांच दिनों से भर्ती छह वर्षीय मासूम की मौत हो गई। हालत नाजुक होने पर चिकित्सक ने आनन-फानन में मासूम को रेफर कर दिया, लेकिन मथुरा ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इकलौते चिराग की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। घटना के संबंध में मृतक के मामा ने क्लिनिक संचालक के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस जांच में जुट गई है।
गांव जरैलिया निवासी विनोद कुमार ने बताया कि उनका छह वर्षीय भांजा देव निवासी लालपुर बीते कुछ दिनों से बीमार चल रहा था। परिजनों ने उसे 5 सितंबर को नौहझील क्षेत्र के एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि पांच दिनों तक क्लिनिक में बच्चे को भर्ती रखकर इलाज किया जाता रहा, लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। जब परिजनों ने उसे किसी बड़े अस्पताल ले जाने की बात कही तो चिकित्सक जल्द ठीक होने का भरोसा देते रहे।डॉक्टरों ने बच्चे को मलेरिया बताकर उसका इलाज जारी रखा और इस दौरान तीन बार प्लेटलेट्स की जांच कराई। पहली रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 76 हजार आईं, जो घटते-घटते दूसरी बार में 59 हजार और तीसरी बार में 50 हजार तक पहुंच गईं। इसके बाद 9 सितंबर बुधवार को अचानक डेंगू की जांच कराई गई और परिजनों को बताया गया कि बच्चे को डेंगू है।
आरोप है कि बुधवार रात्रि करीब साढ़े 10 बजे जैसे ही डॉक्टर ने बालक को ड्रिप चढ़ाई, उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। घबराए क्लिनिक संचालक ने बच्चे को तुरंत मथुरा ले जाने की सलाह देकर पल्ला झाड़ लिया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद शुक्रवार को मृतक के मामा विनोद कुमार ने स्थानीय पुलिस थाने में तहरीर देकर डॉक्टर पर घोर लापरवाही और गलत इलाज करने का आरोप लगाया। सीएचसी प्रभारी डॉ. हेमराज सिंह ने बताया कि यह मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया है और क्लिनिक का नाम भी पहली बार सुन रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच कराई जाएगी क्लिनिक वैध है या अवैध। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जांच में मलेरिया व डेंगू की रिपोर्ट निगेटिव है। पीलिया के चलते बच्चे की मौत हुई है। थाना प्रभारी ने बताया कि तहरीर मिली है जांच कर कार्रवाई की जायेगी।
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घर का बुझा इकलौता चिराग
- मासूम देव अपने घर का इकलौता चिराग था, जिससे पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी थीं। उसकी एक बड़ी बहन खुशी है, जो अपने छोटे भाई का साया सिर से उठ जाने के बाद बेसुध है। इकलौते बेटे की मौत की खबर मिलते ही मां रजनी और पिता सुनील कुमार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रो-रोकर माता-पिता की हालत खराब है।