शहरवासियों की सुविधा और रोडवेज की आय बढ़ाने के लिए आरंभ की गई जेनर्म बस सेवा के संचालन में लगभग चार लाख रुपये प्रतिमाह का घाटा हो रहा है।यात्री किराए से होने वाली आय बसों के रख-रखाव, स्टाफ के वेतन, ईटीएम किराया और डीजल में हो रहे व्यय से बहुत कम है।
जवाहरलाल नेहरू रिन्युअल मिशन के तहत जनपद में रोडवेज विभाग को 60 बस मिली थीं। इन्हें शहरवासियों की सुविधा के लिए शहर क्षेत्र में चलाना था। मगर, बसें जिले के देहात क्षेत्र में ही दौड़ती रहीं। लेकिन रोडवेज को इन बसों के संचालन में लाभ नहीं हो रहा है। औसतन चार लाख रुपये प्रतिमाह के घाटे से चल रहीं इन बसों पर होने वाला व्यय आय से काफी कम है। इनमें मेंटीनेंस, ईटीएम मशीन किराया, डीजल और स्टाफ का वेतन शामिल है।
दिसंबर माह का लेखा-जोखा
- बस चलीं- लगभग तीन लाख 41 हजार किलोमीटर
- डीजल की खपत- लगभग 59 हजार 795 लीटर
- रख-रखाव पर खर्च- करीब 20 लाख 41 हजार 151 रुपये
- ईटीएम मशीन किराया- 44 पैसे प्रति टिकट
- वेतन पर खर्च- करीब 14 लाख रुपये
- कुल आय- 65 लाख 91 हजार 735 रुपये।
आय से अधिक हुआ खर्चा
खर्चा - लगभग 69 लाख रुपये
आय - 65 लाख 91 हजार 735 रुपये
सिटी बस का प्लान फेल
तत्कालीन जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने शहरवासियों की सुविधा के लिए जेनर्म बसों को शहर में चलाने के लिए सिटी बस प्लान तैयार किया था। मगर रोडवेज के अधिकारियों ने नुकसान का हवाला देते हुए एक सप्ताह में ही प्लान को फेल बता दिया। फिर से बस देहात में ही संचालित हैं।