यमुना एक्सप्रेसवे के शुभारंभ के चार साल पूरे हो गए हैं। प्रदेश में रफ्तार की सड़क कहे जाने वाले इस मार्ग को हादसों का एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है। कारण औसतन हर साल यहां होने वाले हादसों की संख्या 650 से अधिक है। 9 अगस्त 2012 को शुभारंभ से अब तक 2598 हादसे इस मार्ग पर हो चुके हैं।
नोएडा से आगरा के बीच करीब 180 किमी के एक्सप्रेसवे पर हादसों की मुख्य वजह निर्धारित गति सीमा से अधिक पर वाहनों का चलना है। आम तौर पर देखा जाता है कि वाहन एक्सप्रेसवे पर आते ही फर्राटा भरने लगते हैं। यहां वाहनों की रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा तय की गई है लेकिन वाहन चालक 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहनों को दौड़ाते हैं। एक्सप्रेसवे के आसपास बसे शहर और गांवों के युवा तो रफ्तार का आनंद लेने के लिए एक्सप्रेसवे पर ड्राइविंग करते हैं।
शराब पीकर वाहनों को चलाने वालों की संख्या भी कम नहीं है। बताया गया है कि एक्सप्रेसवे के चालू होने के समय से यातायात नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। इसे रोकने के लिए प्रशासनिक तौर पर कोई योजना नहीं बन सकी है। इधर, एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ सर्विस रोड बनाने, सड़क के दोनों तरफ स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग अभी भी अधूरी है। ग्रामीणों के आवागमन के लिए अंडरपास बनाए गए जिनकी सफाई नहीं होती है।
निगरानी के लिए लगे कैमरे खराब
एक्सप्रेसवे पर रोजाना करीब 15000 वाहन गुजरते हैं। वाहनों की गति नियंत्रण पर निगरानी के लिए ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 164 सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इस समय सभी कैमरे खराब हालात में हैं। इससे वाहनों की गति पर निगरानी नहीं रखी जाती है। यहीं कारण है कि वाहन चालक यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद चेता प्राधिकरण
हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी के अधिकारियों और जेपी समूह को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वह केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) के सुझावों पर तत्काल अमल करने को कहा है। सीआरआरआई ने वाहनों की गति पर नियंत्रण कराने, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने, जागरूकता के लिए एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्ड व होर्डिंग्स लगाने, टायर फटने की घटनाओं को रोकने के लिए टायरों में नाइट्रोजन गैस भरने की सलाह एक्सप्रेसवे अथॉरिटी और जेपी समूह को दी है। हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद मामले में कुछ कदम उठाए जा रहे हैं।
अब तक 383 ने गंवाई जान
आंकड़ों पर गौर करें तो यमुना एक्सप्रेस वे पर वर्ष 2015 में एक जनवरी से 26 दिसंबर तक 400 से अधिक हादसों में 57 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 210 गंभीर रूप से घायल हो गए। 380 को मामूली चोट आई। एक्सप्रेसवे की शुरुआत नौ अगस्त 2012 से अब तक 2598 हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में 383 लोगों की मौत हुई। 9 अगस्त 2012 से 30 अप्रैल 2015 तक 2194 हादसे हुए, जो लगभग 66 प्रति माह थे। मई 2015 से सितंबर तक 404 हादसे हुए।
इसके हिसाब से हादसों का ग्राफ बढ़ कर 81 प्रतिमाह हो गया। बता दें कि एडीएफ एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसों की जानकारी मुख्यमंत्री को दे चुका है। फाउंडेशन ने यहां पर मानकों की अनदेखी पर भी सवाल उठाए हैं। वही 2016 जनवरी से लेकर 9 अगस्त 2016 तक के हादसों में नजर डाली जाए तो मथुरा जिले के मांट, सुरीर और नौहझील थाना सीमा में करीब 80 हादसे हुए हैं। 26 लोगों की मौत हो गई और 129 गंभीर रूप से घायल हैं। 245 मामूली घायल हैं।
वर्ष हादसे मौत
2012 275 33
(9 अगस्त से 31 दिसंबर)
2013 897 118
2014 771 127
2015 252 41
(1 जनवरी से 30 अप्रैल)
2015 404 64
(1 मई से 30 सितंबर)