वृंदावन के पानीगांव लिंक रोड स्थित 15 साल पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को 20 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक एसबीआर तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। इससे सीवेज का पानी पूरी तरह शोधित होकर सिंचाई योग्य बन सकेगा और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचेगा।
वृंदावन के पानीगांव लिंक रोड स्थित डेढ़ दशक पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में आधुनिक तकनीक से वेस्ट वाटर यानी सीवेज के पानी को शोधित किया जाएगा। सीक्वेंस बैच रिएक्टर (एसबीआर) तकनीक से सीवेज का पानी सिचाई के योग्य बन जाएगा और इसे खुले में छोड़ने पर भी पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा। एसटीपी के करोड़ों रुपये से अपग्रेड होने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार दूषित पानी का शोधन हो सकेगा। पुरानी तकनीक से बने इस एसटीपी प्लांट में पानी को शोधित करने का तरीका काफी पुराना है और शोधन के बाद भी इसमें प्रदूषक तत्वों की मात्रा मौजूद रहती है। एसबीआर तकनीक ज्यादातर यूरोपीय व अन्य बाहरी देशों में इस्तेमाल की जा रही है।
मंदिरों के शहर में जैसे-जैसे तेजी से आबादी बढ़ती गई वैसे ही सीवेज के पानी की मात्रा भी बढ़ती गई। दूषित पानी को शोधित करने के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2010 में समग्र विकास योजना के तहत आठ एमएलडी क्षमता का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया गया था। बनने के दो वर्ष बाद तत्कालीन नगर पालिका द्वारा इसे चालू किया गया। इसमें नगर के राजपुर खादर, रुक्मिणी विहार एवं कालीदह सीवेज पंपिंग स्टेशन जोड़े गए। इन क्षेत्रों का पानी यहां शोधित होता है। पुरानी तकनीक से बने एसटीपी में अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा सीवेज के पानी को शोधित करने के मानकों के अनुरूप शोधित करने की कवायद शुरू हो गई है। जलनिगम नगरीय निर्माण द्वारा शासन को भेजे आधुनिक तकनीक एसबीआर से अपग्रेड करने के प्रस्ताव पर शासन ने स्वीकृति की मोहर लगा दी। इसके बाद जलनिगम ने अपग्रेडेशन की तैयारी शुरू कर दी है।
20 करोड़ रुपये का है बजट
जलनिगम के एई नसीम अहमद ने बताया कि आठ एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडेशन का कार्य किया जाएगा। एसटीपी अपग्रेड होने से सीवेज के गंदे पानी को पूरी तरह से उपचारित कर ड्रेन में छोड़ा जाएगा। शासन ने अपग्रेडेशन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इसके लिए 20 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं।
क्या है एसबीआर टेक्नोलॉजी
सीक्वेंस बैच रिएक्टर टैक्नोलॉजी में बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) लेवल यानी सीवेज के पानी में से प्रदूषक तत्वों को कम करने के लिए ऑक्सीजन को वेस्ट वाटर से गुजारा जाता है। वेस्ट वाटर यानी सीवेज के पानी को शोधित करने के लिए अलग-अगल टैंकों के जरिये पांच चरणों से गुजारा जाता है।