जवाहरबाग हिंसा में गवाही देने के लिए अब तक 113 लोग पहुंचे। सभी ने न्यायिक आयोग के समक्ष पेश होकर अपनी बात रखी। अब जो लोग गवाही से रह गए हैं उन्हें 24, 25 और 26 अक्तूबर को बुलाया गया है। जबकि अधिकारियों को दीपावली के बाद बुलाया गया है।
मथुरा में दो जून को हुई जवाहरबाग हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। इस हिंसा का मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव भी मारा गया था। शासन ने इस पूरे मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया।
जांच के पहले चरण में सभी अधिकारियों के शपथ पत्र लिए गए और फिर गवाही शुरू हुई। पांच दिनों से गवाही की प्रक्रिया चल रही है। इन पांच दिनों के भीतर 113 लोगों ने गवाही दी है। सभी ने कहा है कि प्रशासन की लापरवाही से ही जवाहरबाग पर रामवृक्ष यादव कब्जा कर रहा था।
वह अपने समर्थकों के साथ जवाहरबाग में घुस गया लेकिन प्रशासनिक अफसर खामोश रहे। अगर उसी वक्त ध्यान दिया होता तो आज यह हालात न होते। कुछ लोगों ने कहा कि सियासी दबाव के कारण अधिकारी खामोश रहे।
अब जो लोग गवाही देने से रह गए हैं उन्हें गवाही के लिए 24, 25 और 26 अक्तूबर को बुलाया गया है। जबकि पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को दीपावली के बाद बुलाया जाएगा। यह अफसर अपना शपथ पत्र तो दे चुके हैं लेकिन अभी गवाही नहीं हो सकी है।