हजरत इमाम हुसैन ने दीन और सच्चाई के खातिर अपना तन मन एवं पूरा घराना कुर्बान कर दिया और शहादत का जाम पिया। हजरत इमाम हुसैन ने करबला के मैदान में लोगों को यह दर्शा दिया कि हर हाल में नमाज अदा करनी चाहिए और दीन के खातिर बड़ी से बड़ी कुर्बानी से पीछे नहीं हटना चाहिए। उक्त विचार हाफिज जाकिर साहब ने मोहल्ला काजी में हजरत नाशाह बाबा रहमतुल्ला के उर्स मुबारक मौके पर व्यक्त किए।
हाफिज जाकिर साहब ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन से पूर्व जो कुरीतियां थी वो आज भी हैं। नमाज, रोजा एवं इस्लामी अरकान से लोग पीछे हट रहे हैं और बुराइयों पर जा रहे हैं। सच्चा मुसलमान वही है जो हुजूर मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चले। इस अवसर पर मौलाना सिराजुद्दीन वारसी ने कहा कि सूफी संतों की कृपा सब पर होती है। लोग मुसीबत के समय बुजुर्गों की दरगाह पर जाकर दुआ मांगते हैं। खुदा का सच्चा बंदा वही है जो खुदा की इबादत में अपना सुख चैन तन मन कुर्बान कर दे। उर्स में अफराज अली, औसाफ अली, अरसद अली, फरमान अली, आफताब अली, मुख्तियार हुसैन, अबरार हुसैन, अनवार हुसैन, इस्लाम खां आदि अन्य जायरीन मौजूद थे।