मैनपुरी। जिले की कई रेलवे क्रासिंग पर अभी तक फाटक नहीं हैं। ऐसे में कभी भी मऊ जैसा हादसा हो सकता है। पूर्व में यहां रेलवे क्रासिंग पर कई हादसे हो चुके हैं। उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों ने सभी मानव रहित क्रासिंग पर गार्ड तैनात कर दिए हैं। यह गार्ड आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं।
गुुरुवार को मऊ में मानव रहित रेलवे क्रासिंग से गुजर रही स्कूली बस की ट्रेन से टक्कर के बाद पांच बच्चों की मौत हो गई। इस हादसे ने सभी को हिला दिया है। जिले में करीब 13 रेलवे क्रासिंग ऐसी हैं जिन पर फाटक नहीं है। कुछ समय पूर्व तक उक्त क्रासिंग पर कोई आदमी भी तैनात नहीं था। इसके चलते पिछले दो दशकों में तीन हादसे हो चुके हैं। इनमें चार लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 10 लोग घायल हुए थे। निरंतर हो रहे हादसों के मद्देनजर उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों ने प्रत्येक फाटक रहित क्रासिंग पर गार्ड तैनात कर दिए हैं। इन क्रासिंग पर आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट में गार्ड तैनात किए गए हैं। हालांकि यहां पर अभी तक फाटक नहीं है। इसके चलते कभी भी मऊ जैसे हादसे हो सकते हैं।
अब तक हुए हादसे
- 20 साल पहले रेलवे टिंडौली में रेलवे क्रासिंग पर ट्रैक्टर और ट्रेन में भिड़ंत हुई थी। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी। तब यह क्रासिंग मानव रहित थी
- करीब दो साल पहले इसी क्रासिंग पर जुगाड़ और ट्रेन में भिड़ंत हुई थी। इस हादसे में एक की मौत हो गई थी
- पांच साल पहले मोहनपुरा रेलवे क्रासिंग पर ट्रैक्टर एक ट्रेन से टकरा गया था। इस हादसे में भी एक की मौत हो गई थी
13 रेलवे क्रासिंग पर नहीं हैं फाटक
शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद रेलवे लाइन पर कुल 13 मानव रहित रेलवे क्रासिंग थीं। अब इन सभी पर हादसों के मद्देनजर पांच माह पूर्व गार्ड तैनात कर दिए हैं। यह रेलवे क्रासिंग कारूखेड़ा, विधूना, कोसमा, जवापुर, चिरैयापुर, कोंडर, रठेरा, लालपुर सथनी, बैजनाथपुर, गणेशपुर, मोहनपुर, ब्योंति खुर्द, सिवाई सिनौरा और सूरजपुर हैं।