संसार में सभी वस्तुएं नाशवान हैं। आत्मा न मरती है और न इसका जन्म होता है। यह अपना स्वरूप बदलती है। इसलिए मानव को अपने नाशवान मन की बजाय आत्मा की आवाज सुननी चाहिए। जब भी कोई व्यक्ति किसी गलत कार्य को करता है तो उसे आत्मा ऐसा करने से रोकती है, लेकिन वह मन के वशीभूत होकर गलत कार्य करने को तैयार हो जाता है। यह विचार कस्बा नगला चैनी स्थित मंदिर जाहरवीर बाबा परिसर में चल रही भागवत कथा के दौरान राजेश कुमार शास्त्री ने व्यक्त किए।
कथा व्यास ने कहा कि प्रतिदिन ईश्वर का स्मरण करने से आत्मा की शक्ति मजबूत होती है। ऐसे में व्यक्ति मन का वशीभूत नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप गलत काम करने से बच जाता है। उन्होंने लोगों से अच्छे साहित्य का पठन और मनन करने पर बल देने को कहा। परीक्षित सूबेदार कश्यप, धर्मपत्नी मुन्नीदेवी कश्यप तथा कमेटी के अध्यक्ष बृजेश यादव नगला गढू ने कथा व्यास एवं श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती उतारी। मंदिर के महंत स्वामी छोटेलाल ने यज्ञ में आहुतियां प्रदान कराईं। इस मौके पर रिंकू यादव, नरेश चंद्र, मिस्टरलाल, रामगोपाल, राजेश, जयसिंह सोलंकी, रामाधार गुप्ता, रायसिंह राठौर आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।