मैनपुरी। बेमौसम बारिश से फसलों की बर्बादी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इससे उपजी हताशा और सदमा उनकी जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। मैनपुरी में फसल बर्बाद होने के बाद कर्ज चुकाने की चिंता में घिरे किसान धनीराम यादव ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
धनीराम यादव बरनाहल (मैनपुरी) क्षेत्र के ग्राम नगला बोझिया का रहने वाला था। सोमवार की रात उसने खेत के पास स्थित नीम के पेड़ पर फंदा डालकर खुद को फांसी लगा ली। मंगलवार सुबह लोग खेतों की ओर गए तो घटना का पता चला। उसके चचेरे भाई देवीदयाल ने बताया कि धनीराम ने इस बार 14 बीघा खेत में आलू की बुवाई की थी। इसके लिए उसने बैंक ऑफ इंडिया से 20 हजार रुपये और साहूकारों से करीब 3.50 लाख रुपये का कर्ज लिया था। बरसात के बाद से वह गुमसुम रहने लगा था। सोमवार को आलू की खोदाई पूरी हुई तो उसे जबरदस्त घाटा होता नजर आया और कर्जा चुकाने को लेकर चिंतित था। एसडीएम करहल विजय प्रताप ने डीएम को भेजी अपनी रिपोर्ट में बताया कि धनीराम यादव ने अपने चार बीघा खेत के अलावा 10 बीघा खेत उगाही पर लेकर भी आलू बोया था। सोमवार को आलू की खोदाई कराकर उसे कोल्डस्टोरेज भिजवा दिया। परिवार के लोगों ने बताया कि आलू में मुनाफा कम होने की वजह से उसने आत्महत्या कर ली। एसडीएम की रिपोर्ट में बैंक से ऋण लेने का तो जिक्र किया गया है, लेकिन साहूकारों से कर्ज लेने की बात नहीं कही है।
पूर्व में चार किसान गंवा चुके अपनी जान
फसलों की बर्बादी के चलते पूर्व में भी जिले के चार किसान जान गवां चुके हैं। 14 मार्च को बरनाहल क्षेत्र के ग्राम औरंगाबाद के किसान रोहन सिंह की खेत पर ही फसलें बर्बाद देख सदमे में आकर हार्टअटैक पड़ने से मौत हो गई थी। 15 मार्च को कांकन के किसान राजेंद्र शाक्य ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। 17 मार्च को कुरावली के घरनाजपुर के किसान रामवीर सिंह की सदमे से हार्टअटैक पड़ने से मौत हो गई थी। 20 मार्च को करहल क्षेत्र के ग्राम बूरामई के किसान श्रीचंद्र की भी सदमे से हो गई थी।
जिले में फसलों की बर्बादी को लेकर किसी किसान की मौत नहीं हुई है। कुछ मामलों में फसलों की बर्बादी से मौत होने के दावे आए हैं उनकी जांच कराई जा रही है। आत्महत्या के मामले में मुआवजा दिए जाने का प्रावधान नहीं है।
डाक्टर चंद्रभूषण, एडीएम