मैनपुरी। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने बुधवार को बेसिक स्कूलों में दूध वितरण का बहिष्कार कर बीएसए कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री से संबोधित मांगपत्र एसडीएम को दिया और इसकी एक प्रति बीएसए को भी सौंपी। इसमें कहा कि शिक्षकों को एमडीएम की व्यवस्था से अलग कर स्वयं सेवी संस्था से वितरित कराया जाए।
धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष गोविंद पांडेय ने कहा कि सरकार द्वारा दूध और कोफ्ता चावल के लिए प्रति छात्र 3.89 और 5.65 रुपये उपलब्ध करा रही है। जबकि प्रति छात्र व्यय लगभग 19 रुपये हो रहा है। ऐसी स्थिति में शिक्षक दूध देने असमर्थ हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को लिखित और मौखिक कई बार अवगत कराया गया लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। महामंत्री राजकिशोर यादव ने कहा कि सरकार द्वारा दूध वितरण के लिए धन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। डरा धमका कर शिक्षकों के वेतन से बच्चों को जबरन दूध वितरित कराया जा रहा है। यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। मंत्री नवीन सक्सेना ने कह कि छात्रों को शुद्ध दूध दिया जाए। जबकि दूध की गुणवत्ता जांचने को कोई भी यंत्र शिक्षक के पास नहीं है। अशुद्ध दूध पीने से बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है इससे शिक्षक को भी कार्रवाई का भय बना रहता है। मुख्यमंत्री से संबोधित मांगपत्र में शिक्षकों ने कहा कि यदि जल्दी कोई निर्णय न लिया गया तो 23 सितंबर से पूरे जनपद में दूध वितरण का बहिष्कार कर दिया जाएगा। धरने में कोषाध्यक्ष अवधेश शाक्य, मोहम्मद रफी, कृष्ण, शीलेश कुमार, रामगनेश, मनोज यादव, राजकिशोर यादव, रजनीश यादव, मुकेश यादव, जयवीर सिंह, सुभाष सिंह, मयंक मिश्रा, नृपेंद्र शर्मा, संजीव दुबे, चुन्नी देवी, मिथलेश दीक्षित, दीपेंद्र आदि मौजूद थे।