नगर में हजरत इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम परंपरागत ढंग से मनाया गया। ताजियों के जुलूस निकाले गए। करबला पर मर्सिए पढ़े गए और देर रात्रि ताजिये सुपुर्द-ए-खाक किए गए।
हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम पर ताजियों की जियारत के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। ताजियों का काफिला करबला पहुंचा जहां ताजिये सुपुर्दे खाक किए गए। इसके बाद फातिहा हुई। हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर कई जगह लंगर में खाना खिलाने का कार्य हुआ। नमाज के बाद विभिन्न स्थानों से ताजियों का उठना शुरू हुआ और सभी ताजियेदार ताजिये के जुलूस लेकर बड़े चौराहा पर एकत्रित हुए।
बड़े चौराहे पर अखाड़ा हुआ। अखाड़े में नौजवानों ने हैरतअंगेज करतब दिखाकर लोगों को दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर कर दिया। मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष जमील खां, मोहम्मद एजाज उर्फ गुड्ड्, मोहम्मद आजम खां, सलीम खां, नदीम इलाही, सादाव असलम, सिराज, रवि, वसीम, फैसल, सकीर, गुलाब हुसैन, इमरान आदि ने ताजियेदारों को पगड़ी बांधकर हौसलाअफजाई की। ताजियेदारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
बड़े चौराहे से ताजियों का जुलूस शुरू हुआ। ताजियों की छटा देखने के लिए हजारों हिंदू और मुस्लिमों का जन सैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा। ताजियों पर चांदी अबरक और पन्नी के अलावा प्लास्टिक शीट पर नक्काशी की गई थी। बड़े चौराहे से शुरू हुआ ताजिये का जुलूस कृष्णा टाकीज रोड, देवी रोड, कटरा होता हुआ मदार दरवाजा पहुंचा जहां लोगों ने रोशनी का इंतजाम किया था। मदार दरवाजे पर अखाड़े के कलाकारों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए।
इसके पश्चात सभी ताजिये सलामी के लिए किले के पीछे दरगाह शरीफ पहुंचे। वहां देवी रोड होते हुए करबला शरीफ पहुंचे जहां गमगीन माहौल में ताजिये सुपुर्द ए खाक किए गए। वहीं मंगलवार की रात बड़े चौराहे पर कुरआन ख्वानी का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान महिलाओं और बच्चों ने कुरआन की तिलावत की। इस दौरान लोगों ने स्टॉल लगाकर हलीम, खीर, बिरयानी, केसर का दूध वितरित किया। इस मौके पर हाजी एहसान राइन, असरफ, चंदा राइन, अकरम, मुवीन आदि ने स्टॉल लगाकर छबील की।