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जेल प्रशासन पर घूमी शक की सुई

Tue, 14 Mar 2017 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
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जेल प्रशासन पर घूमी शक की सुई - फोटो : अमर उजाला
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जिला कारागार से सोमवार को चार बंदियों के भागने के मामले में शक की सुई जेल प्रशासन पर ही घूम रही है। कई घंटा पूर्व जानकारी होने के बावजूद डीएम व एसपी को शाम छह बजे जानकारी देना जेल प्रशासन पर ही सवाल उठा रहे हैं। वहीं निर्माणाधीन बैरक के पास सुरक्षा को लेकर भी गारद न होने की बात भी सामने आई है।
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जिला कारागार से सोमवार को एक ओर बंदी होली खेल रहे थे। वहीं बैरक नंबर एक में बंद राजेंद्र, मुंसाद, बैरक नंबर सात के सुनील और बैरक नंबर 18 के बंदी योगेंद्र के साथ जेल से भागने की योजना बना रहे थे। 11 से दो बजे के बीच चारों बंदी कारागार के पिछले हिस्से की दीवार फांदकर भाग गए। दोपहर तीन बजे जब बंदियों की गिनती की गई तो चारों बंदी गायब मिले। दोबारा गिनती में ऐसा ही हुआ। जिसके बाद परिसर में चारों की खोज शुरू कर दी गई। पता चला कि जेल में जिस स्थान पर 10 नई बैरक बनाए जाने का काम चल रहा है। वहां से चारों निर्माणाधीन पिलर की सरिया को टेड़ा कर चढे़। वहां तक पहुंचने के लिए उन्हाेंने परिसर में रखी सरियों का सहारा लिया गया। आनन-फानन में जेल में एलर्ट जारी कर दिया गया। आसपास क्षेत्र में तलाश भी की गई मगर कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इस बीच करीब छह बजे आखिरकार डीएम चंद्रपाल सिंह और एसपी सुनील कुमार सक्सेना को घटना की जानकारी दी गई। वहीं बैरक निर्माण के लिए जिस स्थान पर गारद को तैनात होना चाहिए था। बंदी भागने के समय वहां कोई भी मौजूद नहीं था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उन्हें वहां से हटा दिया गया था। वहीं कई घंटों तक घटना को दबाए रखना भी संदेह जाहिर कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि जेल अधीक्षक भी होली के दिन वहां नहीं आए थे।

                        
बैरक नंबर एक में बनी थी भागने की योजना
 जिला कारागार की बैरक नंबर एक में जेल से भागने की योजना तैयार की गई थी। उक्त बैरक में सजायाफ्ता डाक्टर राजेंद्र और शूटर मुंसाद बंद थे। सूत्रों की मानें तो कुछ दिन से दोनों साथियों से कम बात करते थे। वहीं बैरक नंबर 18 (21 से 18 वर्ष के बंदियों को रखा जाता है) में बंद योगेंद्र और बैरक नंबर सात में बंद सुनील के साथ अधिक दिखाई दे रहे थे। योगेंद्र और मुंसाद ने ही जेल से भागने की प्लानिंग की थी। हालांकि अधिकारी अभी कुछ भी कहने से इंकार कर रहे हैं।
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खुफिया विभाग भी जांच में जुटा
जेल से चार बंदियों के भागने के बाद खुफिया विभाग भी एलर्ट हो गया। बंदी के बारे में सभी जानकारी जुटाने के बाद जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई। वहीं तलाश के लिए भी टीमों ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।

डीआईजी जेल भी पहुंचे
 सोमवार को चार बंदी भागने की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को डीआईजी जेल आगरा परिक्षेत्र शरद कुमार जिला कारागार पहुंचे। कई घंटे तक उन्होंने निरीक्षण किए जाने के साथ ही जेल अधीक्षक व जेलर से जानकारी जुटाई। हालांकि अभी तक उक्त मामले में जेल प्रशासन के किसी भी अधिकारी व अन्य कर्मी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

दो आरक्षी भी संदेह के घेरे में
बंदियों को भागने के मामले में दो आरक्षियों पर भी शक की सुई घूम रही है। हालांकि अभी नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। वहीं अधिकारी ऐसी किसी भी बात से इंकार करते हुए जांच की बात कह रहे हैं।

समय रहते मिलती जानकारी तो पकडे़ जा सकते थे बंदी
भागे बंदियों के बारे में अगर जेल प्रशासन समय पर पुलिस को सूचना दे देता तो शायद बंदी पकडे़ भी जा सकते थे। चार से पांच घंटा बाद अधिकारियों को सूचना दी गई। इतने अंतराल में बंदी निश्चित तौर पर जनपद की सीमा से बाहर जा चुके होंगे।
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