एक ओर जिले भर में तेजी से जलस्तर गिर रहा है। वहीं दूसरी ओर अधिकारी इस ओर उदासीन बने हुए हैं। यही कारण है कि सरकारी और सार्वजनिक भवनों में अनिवार्य रूप से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश के बाद भी शहर में सिर्फ दस भवनों पर ही यह सिस्टम लगे हुए हैं।
तेजी से गिरते भूगर्भ जल स्तर को उठाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाता है। शासन के निर्देश के अनुसार इसके लिए घनी आबादी वाले क्षेत्रों के भवनों को चिह्नित कर वहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए। ताकि भूमिगत जल के स्तर को उठाया जा सके। इसके तहत पिछले साल शहर में मात्र दस भवनों को चिन्ह्ति किया गया था। उक्त भवनों में ही मात्र रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है।
इसके अलावा बड़ी संख्या में निजी और व्यवसायिक भवन शहरी क्षेत्र में बन रहे हैं। इनमें से किसी में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की भवन स्वामियों और न ही नक्शा आदि पास करते समय ही अधिकारियों ने जरूरत समझी।
ये है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
इस सिस्टम के तहत 1500 वर्ग फीट से अधिक के भवनों की छत पर एकत्रित बारिश का पानी एक पाइप के जरिए बोरिंग में डाला जाता है। बारिश में इस सिस्टम से बड़ी मात्रा में पानी को भूगर्भ स्रोतों में डाला जा सकता है।
पूर्व में डार्क जोन में आ चुका है मैनपुरी ब्लाक
मैनपुरी ब्लाक कुछ साल पहले डार्क जोन में शामिल हो चुका था। इसका कारण ब्लाक में तेजी से भूगर्भ जल का स्तर काफी नीचे जा चुका था। हालांकि अब मैनपुरी ब्लाक डार्क जोन से बाहर आ चुका है। योजना का उद्देश्य भूगर्भ जल के स्तर को ऊंचा उठाना है।