देर रात सरकार के आए फैसले से बाजार में सन्नाटा पसर गया। जैसे ही लोगों ने सुना की बुधवार से एक हजार और पांच सौ के नोट नहीं चलेंगे तो बड़े व्यापारी तो दूर आम आदमी तक सकते में आ गया। सभी यही पूछने लगे कि आखिर इस निर्णय का कारण क्या है। हालांकि सरकार ने बैंकों को उक्त नोट वापस करने के लिए 50 दिन का समय दिया है। यह और बात है कि बाजार में बुधवार से ही नोट प्रचलन से बाहर हो जाएंगे। इसे लेकर लोगों में नाराजगी है। वहीं देर रात से ही दुकानदारों ने लोगों से दोनों ही नोट लेना बंद कर दिया।
मंगलवार रात लगभग आठ बजे जैसे ही समाचार चैनलों पर पांच और हजार के नोट बंद होने की खबर फ्लैश हुई बाजार में सन्नाटा पसर गया। किसी को भी ऐसे फैसले की उम्मीद नहीं थी। बड़े व्यापारी ही नहीं आम आदमी भी सकते में आ गया। इसका मुख्य कारण बुधवार से ही इन नोटों का प्रचलन से बाहर होने का निर्णय लेना था। खबर प्रसारित होते ही बाजार में दुकानदारों ने पांच सौ के नोट ही लेना बंद कर दिया। यही नहीं रात में ही पेट्रोल पंप संचालकों तक ने उक्त नोट लेना बंद कर दिया। जिन लोगों को सरकार के निर्णय के बारे में जानकारी नहीं वे दुकानदारों और पेट्रोलपंप के कर्मचारियों से भिड़ गए।
सरकार के इस निर्णय को लेकर हालांकि बाजार में मिली जुली प्रतिक्रिया देखने के लिए मिली। पेट्रोल पंप स्वामी घनश्यामदास गुप्ता का कहना है कि सरकार का उक्त निर्णय सही है। तमाम प्रयासों के बाद भी जो कालाधन बाहर नहीं निकल रहा था सरकार के इस निर्णय से वह बाहर आ जाएगा। इस संबंध में बुक स्टाल के मालिक आदेश जैन का कहना है कि सरकार को यदि यही निर्णय लेना था तो लोगों को कुछ समय और देना चाहिए था। इस प्रक्रिया को एक सिस्टमेटिक क्रम से शुरू करना चाहिए था।
डाक्टर मनोज यादव का कहना है कि सरकार का इरादा तो नेक है लेकिन तरीका थोड़ा सही नहीं है। सरकार को यदि काले धन पर लगाम लगाना ही है तो उसके लिए बड़ी मछलियों के यहां छापेमारी की जाए। वहीं स्टेशन रोड पर रहने वाले प्रवीन अवस्थी का कहना है कि सरकार का यह हिटलर शाही निर्णय गलत है। एक आम आदमी अब घर की जरूरत का समान लेने में भी बुधवार से दिक्कत महसूस करेगा। एटीएम से पांच सौ के ही नोट निकलते हैं। ऐसे में वह उन नोटों से ही अब तक खरीदारी करता रहा है। सरकार को चाहिए था कि बाजार में नोट चलाने पर पाबंदी न लगाकर 90 दिन में सभी नोट बैंक में जमा करने का ही निर्णय लेती।