कुसमरा में नराइच तालाब के पास शीतला माता का मंदिर है। यह मंदिर कब बना इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। यहां की एक विशेषता है कि मंदिर के पास स्थित तालाब की भी पूजा करने की परंपरा है। चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
कसबा के कटरा मोहल्ला में स्थित शीतला माता मंदिर की मान्यता है कि यहां पर मनौती मानने के बाद पास स्थित नराइच तालाब में स्नान किया जाए तो इच्छा जरूर पूरी होती है। यही कारण है कि जितनी मान्यता इस मंदिर की है उतनी ही तालाब की भी है। तालाब के जल के अलावा किसी और जल से माता की प्रतिमा को स्नान नहीं कराया जाता है। किवदंती है कि माता की प्रतिमा को पसीना बहुत आता है। यही कारण है कि पहले मंदिर को शीतल रखने के लिए काफी उपाय किए जाते थे।
कई साल पहले मंदिर में भक्तों ने एसी लगवा दिया है। लोगों की मानें तो माता की पूजा के बाद तालाब में स्नान करने भर से तमाम गंभीर संक्रामक रोगों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि कितनी भी गर्मी पड़े इस तालाब का पानी कभी नहीं सूखता है। एक शिवलिंग कई साल पहले मंदिर के दक्षिण पूर्व में सफाई करते समय निकला था जिसे गड्ढे वाले महादेव कहा जाता है।
बताया जाता है कि काफी समय पहले इस तालाब के किनारे 101 मूर्तियों की स्थापना करवाई गई थी। जो बाद में खंडित हो गई वो अभी भी तालाब किनारे मौजूद हैं। इन टूटी मूर्तियों के विषय में दो किवदंतियां हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मुगलकाल में मुसलमानों ने इन मूर्तियों को तुड़वाया था। वहीं कुछ बुजुर्गों का कहना है कि देवी देवताओं और देवी के बीच यु्द्ध हुआ था। इसमें ये मूर्तियां पराजित हुई थीं। इसलिए इनका सिर-धड़ अलग- अलग है। कहा जाता है कि इनके पास नाग-नागिन रहा करते हैं।