अगर केंद्र सरकार ने शरीयत कानून को छेड़ा तो केंद्र सरकार को मुस्लिम समाज नेस्तनाबूद कर देगा। आज तक किसी नेता ने शरीयत के कानूनों के विरोध में कोई बयान नहीं दिया है। यह विचार फर्रुखाबाद के हाफिज मुस्तफा जफर ने मोहल्ला फाजिलगंज स्थित दरगाह में व्यक्त किए।
रविवार को खानकाह रसीदिया के सज्जादानशीन हाजी अब्दुल रहमान चिश्ती उर्फ बबलू मियां की अध्यक्षता में हुए जलसा में उन्होंने कहा प्रधानमंत्री छत्तीस इंच का सीना रखने वाले भले ही हैं लेकिल अल्लाह के नियम को तोड़ने का अगर प्रयास किया तो मुस्लिम समाज उनको राजनीतिक रुप से समाप्त कर देगा। हाफिज खालिद रजा नूरी ने कहा कि सिर्फ नारों से काम नहीं चल सकता है। एकजुट होकर केंद्र सरकार द्वारा बनाये जा रहे कानून का पुरजोर विरोध करना जरूरी है। मौलाना अब्दुल रज्जाक ने कहा मुस्लिम पर्सनल ला अल्लाहताला का बनाया गया कानून है। 14 सौ वर्षो से दुनिया के मुसलमानों पर यह कानून लागू है जिसे पूरी दुनिया का मुसलमान पूरी तरह मानता है। मौलाना ईशाक मुल्ला ने कहा हम मुस्लिम बाद में हैं पहले भारत वासी हैं। लेकिन दीन के साथ छेड़खानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एएच हाशमी एडवोकेट ने कहा कि मुस्लिम धर्म में महिलाओं का सम्मान अन्य धर्मों से ऊपर है। हमारे धर्म में मां बहन को अल्लाह ताला के बाद सबसे ऊंचा दर्जा दिया गया है। जलसे में तैयार ज्ञापन को पढ़कर सुनाया। जिसका सभी ने समर्थन करते हुए सरकार के तीन तलाक कानून के विरोध का प्रस्ताव पारित किया।
जलसे को कासंगज, एटा, अलीगढ़, आगरा, फीरोजाबाद से आए मोहम्मद उमर, अब्दुल रज्जाक, जमालुद्दीन, तारिक जमील, मुफ्ती कासिम रजा, मुफ्ती मुहम्मद अख्तर, मौलाना अमीन अख्तर, नईमुददीन, कारी जुबैर शाह, हाफिज नावेद, हाफिज अरवाज, उलेमा खालिद रजा ने भी संबोधित किया। इस मौके पर चेयरमैन प्रतिनिधि अकबर कुरैशी, अफसर नवाज खान, मुहम्मद शमीम, हाफिज जी, इमरान जावेद, अब्दुल सलाम, मोहम्मद शकील उर्फ फूलमिंया आदि मौजूद थे।
तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
भोगांव (ब्यूरो)। जलसे में उपस्थित मुस्लिम धर्मगुरुओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। ज्ञापन में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। जलसे में मौजूद लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सुरक्षा के लिहाज से कार्यक्रम स्थल के पास भारी पुलिस बल मौजूद रहा।