आज समाज में सहनशीलता और सामंजस्य की कमी के चलते परिवारों में विघटन हो रहा है। जिससे लोगों में तनाव जनित रोग बढ़ रहे हैं। यदि शिव परिवार से सामंजस्य व सहकार की शिक्षा लें तो लोगों का जीवन तनाव मुक्त हो सकता है। यह प्रवचन आचार्य कौशिक महाराज ने दिए।
सोमवार को श्री एकरसानंद इंटर कालेज परिसर में चल रही महाशिवपुराण कथा के दूसरे दिन आचार्य ने कहा देवाघिदेव महादेव के गले में नागों का हार है जबकि उनके एक पुत्र षडानन कार्तिकेय के वाहन मयूर का भोजन सांप है। शिवजी के वाहन नंदी तथा माता पार्वती यानी दुर्गा जी के वाहन शेर का भी आपस में बैर है। गणपति का वाहन मूषक भी नाग का आहार है लेकिन शिव परिवार में ये सभी अपने सहज स्वभाव को छोड़कर आनंद से रहते हैं। लोग यदि परिवार में आपस की छोटी मोटी कमियों को नजरंदाज कर प्रेमभाव से रहें तो समाज में सुख शांति का वातावरण बनेगा।
आचार्य ने कहा शिवपूजा में भस्म और रुद्राक्ष का विशेष स्थान है। एक मुखी रुद्राक्ष विशेष महिमाशाली तथा दुर्लभ भी है। यजमान राजकुमारी दीक्षित तथा शिवमंगल सिंह यादव घिरोर ने आचार्य पूजन किया। कथा में डा. कौशलेंद्र दीक्षित, संजय गुप्ता, सुरेशवीर सिंह, एसएन सिंह, उमेशचंद्र दुबे, राजीव मिश्रा, प्रवीन यादव, पंचू पांडेय, अवनीश दुबे, प्रशांत मिश्रा, रामदेव शास्त्री, किशन दुबे आदि मौजूद थे। आदि मौजूद थे।
यूपी में गो संवर्धन के लिए गोशालाओं की जरूरत
आचार्य कौशिक महाराज ने कहा उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा गोकशी हो रही है। गो संरक्षण और संर्वधन की आज जरूरत है।
सोमवार को राधारमण रोड स्थित एक मैरिज होम में पत्रकार वार्ता में आचार्य ने कहा अगर नोटबंदी से देश का भला होता है तो उसका स्वागत है। मोर और शेर की तरह गाय को भी राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए। एक संत पर चारित्रिक आरोप लगने के बाद से लोगों की आध्यात्म के क्षेत्र में सक्रिय संतों और महात्माओं के प्रति आस्था घटी है। गाय के दूध और गोमूत्र में अधिकांश रोगों के निवारण की क्षमता है। खेती में जहरीली दवाओें और रसायनों के प्रयोग से सब्जियां तथा अनाज प्रदूषित हो रहा है। यूपी में गो संर्वधन के लिए गोशालाओं की जरूरत है।