मैनपुरी। सूखे की मार के बाद धान की उचित कीमत नहीं मिलने से परेशान किसानों को बारिश ने बड़ा झटका दिया है। शनिवार को दिन भर रुक-रुककर हुई बारिश के चलते कृषि मंडी में बेचने के लिए लाया गया धान भीग गया। मंडी में किसानों का करीब एक हजार क्विंटल धान भीगने का अनुमान लगाया जा रहा है। अब भीगा हुआ धान किसानों को काफी कम कीमत पर बेचने को विवश होना पड़ेगा। वहीं कृषि मंडी में बारिश के बाद कीचड़ होने से स्थिति बदहाल हो गई है। जिससे किसान और आढ़ती दोनों ही परेशान हैं।
शनिवार को मंडी में धान बेचने आए किसानों को बड़ा झटका लगा है। पूरे दिन रुक-रुककर हुई बारिश के चलते किसानों का धान खरीदा नहीं जा सका और खुले में रखा करीब एक हजार क्विंटल धान भीग गया। बारिश से बचने के लिए मंडी में किसानों द्वारा लाई जाने वाली उपज को रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऊसराहार से धान लेकर बेचने आए राजू ने बताया कि शनिवार को पूरे दिन बारिश के कारण धान की खरीदारी ही नहीं की गई। ऐसे में उसका ही नहीं 50 से अधिक किसानों का धान भीग गया है। किसान गोविंद यादव का कहना था कि भीगा धान अब काफी कम कीमत पर बेचना पड़ेगा। भीगे धान को वापस घर भी तो नहीं ले जाया जा सकता।
रविवार को कई किसान धान के आसपास से पानी को निकालते नजर आए। किसान रामसेवक का कहना था कि पहले ही धान की कीमत काफी कम मिल रही थी अब धान भीगने के बाद आढ़ती मनमानी कीमत पर धान खरीदेंगे। किसानों का कहना था कि मंडी में बारिश से बचाव के लिए टिनशेड की व्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि बारिश होने पर किसान अपनी उपज को भीगने से बचा सकें। आढ़ती वीर सिंह भदौरिया ने कहा कि मंडी से अच्छा राजस्व प्राप्त होने के बाद भी मंडी की दशा में सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किया जाता। जल निकासी की व्यवस्था न होने से हल्की बारिश में ही कीचड़ के हालात बन जाते हैं।