जिला होम्योपैथिक चिकित्सालयाें में दवा न होने के चलते अस्पताल बंद पड़े हैं। इसके चलते रोगियों को बिना उपचार के ही लौटना पड़ता है। कारण चिकित्साधिकारी का स्थानांतरण होने के बाद भी वह न ही चार्ज छोड़ रहे हैं और न ही दवाएं दे रहे हैं। इसके चलते चिकित्सकों ने बुधवार को जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी कार्यालय में ताला डाल दिया।
जिला अस्पताल परिसर में बना होम्योपैथिक चिकित्सालय सहित सभी चिकित्सालयों में दवाओं का टोटा है। इसके चलते डाक्टर और कर्मचारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। डाक्टरों के अनुसार कई बार जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी को मांगपत्र भेजा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं प्रभारी होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी घिरोर डाक्टर एसपी सिंह का कहना है जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डाक्टर राकेश कुमार का स्थानांतरण भी मथुरा के लिए हो गया है और यहां के लिए शैलेश प्रताप को चार्ज देने को कहा गया है। साथ ही उन लोगों का आठ माह से वेतन भी नहीं दिया है। इस संबंध में डीएम भी लिखित आदेश दे चुके हैं। इसके बाद भी चार्ज नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं दवाएं कार्यालय में अधिक मात्रा में रखी हुई हैं, पर अस्पतालों में नहीं भेजी जा रही हैं। इसके चलते उन लोगों ने बुधवार को डीएम के मौखिक आदेश पर जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के कार्यालय में ताला डाल दिया है। यह ताला तभी खुलेगा जब वह चार्ज छोड़ देंगे और दवाएं अस्पतालों में पहुंच जाएंगी। इस मौके पर प्रभारी चिकित्साधिकारी रामनिवास, डाक्टर निधि वर्मा, कमलेश यादव, शिशुपाल सिंह, राकेश, अमरदीप आदि शामिल हैं।
यह नहीं हैं दवाएं
जिला होम्योपैथिक अस्पताल में छह माह से दवा वितरण के पर्चे नहीं हैं। साथ ही बुखार, खसरा, चर्मरोग, हैजा, वायरल फीवर, त्वचा रोग, खांसी जुकाम आदि की दवाए नहीं हैं।
16 में से पांच केंद्र पड़े बंद
जिले में होम्योपैथिक दवा वितरण के लिए 16 गांव में होम्योपैथिक दवा वितरण केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से पांच केंद्र तो महीनों से बंद पड़े हैं। इनमें कोसमा, नेगवा खिरिया, मनौना, मंछना, नौनेर आदि शामिल हैं। इतना ही नहीं सीएमओ परिसर में बना होम्योपैथिक कार्यालय भी बंद पड़ा है।