मुआवजे के लिए प्रदर्शन करते किसान
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समान पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि का मुआवजा वितरण अधिकारियों के गले की फांस बन गया है। शासन ने 1990 के सर्किल रेट से हिसाब से मुआवजा बांटने के निर्देश दिए हैं, किसान इस दर पर तैयार नहीं हैं। उनका कहना हैं कि उन्हें मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिया जाए। अब जिला प्रशासन किसानों की मांग के अनुरूप एक प्रत्यावेदन शासन को भेजने की तैयारी कर रहा है।
मंगलवार को डीएम पीसी गुप्ता ने सीडीओ डाक्टर उज्ज्वल कुमार, एडीएम एलए आगरा, उपवन संरक्षक चंबल वाइल्ड लाइफ सेंचुरी अनिल कुमार पटेल, एडीएम राकेश कुमार मालपाणी के साथ बैठक की। काफी देर चली बैठक में तय हुआ कि डीएम की ओर से वर्तमान सर्किल रेट से मुआवजा वितरित करने के लिए शासन को एक प्रत्यावेदन भेजा जाएगा। शासन स्तर पर जो निर्णय होगा उसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बता दें, 1990 में समान पक्षी विहार के लिए लगभग 850 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई थी। तब से किसान लगातार मुआवजा मांगते रहे और उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता रहा। 26 साल बाद पिछले वित्तीय वर्ष में शासन से 1.72 अरब रुपये दो किस्तों में जारी कर किसानों को मुआवजा देने के निर्देश दिए। शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसानों को 1990 के सर्किल रेट से ही मुआवजा दिया जाए। किसानों को यह पता चला तो उन्होेंने विरोध शुरू कर दिया। इसके चलते पिछले पांच माह से किसानों को मुआवजा का वितरण नहीं हो पा रहा है। जबकि रकम खाते में पड़ी हुई है।
तो मिलेगा 18 गुना मुआवजा
मैनपुरी। सूत्रों की मानें तो जो भूमि समान पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत की गई है। उसके सर्किल रेट में 1990 से लेकर अब तक 18 गुना वृद्धि हो गई है। ऐसे में यदि प्रत्यावेदन स्वीकर कर लिया जाता है और किसानों को वर्तमान सर्किल रेट से मुआवजा देने का निर्णय होता है तो किसानों को 18 गुना अधिक पैसा मिलेगा। इसका सारा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा।