फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर हमने 16 के बदले 32 सर काटे होते....

Sun, 24 Apr 2016 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
विज्ञापन
कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
श्रीदेवी मेला और ग्राम्य सुधार प्रदर्शनी के कादंबरी रंगमंच पर शनिवार को महफिल सजी। कवियों ने एक से बढ़कर काव्य पंक्तियों के जरिए रविवार सुबह तक श्रोताओं को बांधे रखा। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। शुभारंभ सांसद तेज प्रताप सिंह यादव ने फीता काटकर किया। 
विज्ञापन


सांसद तेजप्रताप ने कहा कि मैनपुरी की जमीन सांस्कृतिक धरोहरों से भरी पड़ी है। बलवीर सिंह और उदयप्रताप सिंह जैसी प्रतिभाओं से मैनपुरी की पहचान है। शुरूआत डा. विष्णु सक्सेना ने सरस्वती वंदना से की। कवि कुंवर जावेद ने दीवालियों और ईदों पे वो क्यों नहीं लिखते, सभी की सोई उम्मीदों पे क्यों नहीं लिखते, किताबें ही लिखने का शौक है तो नेताओं वतन के शहीदों पे क्यों नहीं लिखते, सुनाया। 

सबीना अदीब ने कहा कि मेरे होठों पे शिकायत भी नहीं आएगी, सामने सबसे हकीकत भी नहीं आएगी, बस मुझे बेपफा कह दीजिए मर जाउंगी, आप पर कत्ल की तोहमद भी नहीं आएगी, डाक्टर सुमन दुबे ने कहा कि तंग दिल जमाना है, साथ नहीं चल नहीं सकते, तुम भले ही बदल जाओ हम बदल नहीं सकते, उदयप्रताप यादव ने एक वक्त की रोटी पाते आधे हिंदुस्तानी लोग, जग के सबसे महंगे घर में रहते हैं अंबानी लोग, सुनाया। विनीत चौहान ने कहा कि भारत के मुंह पर हिंसा के फिर न ये चांटे होते, गर हमने 16 के बदले 32 सर काटे होत, सुनाकर सभी को भावुक कर दिया। डा. अनुसपन ने कहा तुमने दिए जो जख्म वो नासूर हो गए, पर हम तुम्हारे नाम से मशहूर हो गए। 
विज्ञापन

कुं. बेचैन ने कहा कि कभी टूट के तो कभी जुड़ के आए, मगर हम तेरे पास ही उड़के आए। कवि सम्मेलन में सुरेंद्र दुबे, बलराम श्रीवास्तव, गजेंद्र सोलंकी, महेंद्र अजनवी, प्रताप सिंह फौजदार ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता हिंदी संस्थान के अध्यक्ष पूर्व सांसद उदयप्रताप यादव ने की। संचालन शशिकांत यादव ने किया। इस दौरान संयोजक विधायक सदर राजकुमार यादव, सह संयोजक दयाशंकर तिवारी, सूरज यादव ने कवियों को प्रतीक चिन्ह देकर और शॉल उढ़ाकर सम्मानित किया। इस मौके पर एमएलसी अरविंद यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आशु दिवाकर, पालिकाध्यक्ष साधना गुप्ता, खुमान वर्मा, अतुल तिवारी, रोमित अरोरा, डीएम लोकेश एम आदि मौजूद थे।  

अशोक चक्रधर ने सुनाए ये व्यंग्य
कवि अशोक चक्रधर ने कहा कि मैमने को लेकर बकरी जंगल में आ रही थी, सामने से शेर आया शेर को देखकर बकरी और मैमना डर गए। मैमने ने शेर से कहा कि शेर अंकल आप मुझे खा जाओगे क्या, शेर ने मैमने के सिर पर पंजा रखा और कहा कि आयुष्मान भव, दोनों वापस चल दिए, बकरी बोली लगता है चुनाव आने वाला है।  
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें