आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगर पालिका, पंचायत में कोई व्यवस्था नहीं है। पशुओं को पकड़ने के लिए जिले में सिर्फ एक वाहन है। वह भी किसी कोने में धूल फांक रहा है। वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन न होने से हर रोज करीब 200 मरीज लौट रहे हैं।
वीआईपी जिला कहलाने वाले मैनपुरी में दो हजार से अधिक आवारा पशु खुले घूम रहे हैं। जिनके काटने से करीब दो लोग जान गवां चुके हैं। कई हमलों में घायल हुए हैं। वहीं इन जानवरों को पकड़ने के लिए नगर पालिका मैनपुरी के पास सिर्फ एक वाहन है जो की किसी कोने में धूल फांक रहा है। वहीं भोगांव, बेवर, कुसमरा, किशनी, करहल, घिरोर, ज्योंति खुड़िया और कुरावली नगर पंचायत में तो कोई वाहन उपलब्ध नहीं है न ही यहां आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए कभी प्रयास ही किए गए हैं। वहीं कुत्ता या बंदर काटने के बाद जब मरीज जिला अस्पताल में जाता है तो वहां एंटी रैबीज का स्टाक नहीं रहता है।
दो लोगों की हुई मौत, कई हमले में हुए हैं घायल
मैनपुरी। गांव अंतपुर में आवारा सांड़ के हमले में कुछ दिन पूर्व एक वृद्ध की मौत हो गई थी। वहीं थाने में कालू नाम के एक कुत्ते ने अभी तक करीब एक सैकड़ा से अधिक ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों को शिकार बना लिया है। वहीं थाना बिछवां क्षेत्र में भी पिछले साल सांड के हमले में एक महिला की मौत हुई थी। कई लोग हमले में घायल भी हुए हैं। इसके अलावा शहर में भी कई महिलाएं पुरुष आवारा पशुओं के हमले में चोटिल होते रहते हैं।
जिले में कुल एक गाड़ी है चुनाव समाप्त होने के बाद उसे आवारा पशु पकड़ने के लिए भेजा जाएगा।
- रामपाल, ईओ नगर पालिका