मैनपुरी। वन गायों से परेशान 80 गांवों के किसानों की समस्या शासन तक पहुंच गई है। शासन ने वन गायों की समस्या से निजात दिलाने के लिए वन विभाग को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए है। वहीं जिला प्रशासन को भी वन गायों की समस्या को दूर करने के लिए योजना तैयार करने को कहा गया है।
बताते चलें कि करहल, बरनाहल और घिरोर ब्लाक क्षेत्र के 80 गांवों के किसान वन गायों से बेहद परेशान हैं। क्षेत्र के सैकड़ों किसान वन गायों के कारण तबाह हो चुके हैं। गाय को मां का दर्जा देने वाले किसान उन्हें मार भी नहीं सकते। खेतों की रखवाली करते समय दो किसानों की हत्या की जा चुकी है। एक किसान फसल बर्बाद होने पर आत्महत्या कर चुका है और एक किसान की हार्टअटैक से मौत हो चुकी है। तीन किसानों का अपहरण हो चुका है। वन गायों की समस्या से निजात दिलाने के लिए किसान कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं। भारतीय किसान यूनियन के अलावा पिछले माह घिरोर तहसील बनाओ संघर्ष समिति के बैनरतले भी आंदोलन शुरू किया गया था।
समिति के संयोजक धर्मवीर राही ने बताया कि वन विभाग वन गायों की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए योजना तैयार कर रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने इस संबंध में जिला प्रशासन से भी योजना तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्हें समस्या की जानकारी के लिए लखनऊ बुलाया गया था।
प्रशासन ने किसानों के साथ किया मंथन
शनिवार को कलेक्ट्रेट स्थित डीआरडीए सभागार में डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन गायों की समस्या को लेकर मंथन किया गया। अधिकारियों के साथ भाकियू के पदाधिकारी और किसानों ने भी वन गायों की समस्या को लेकर अपने सुझाव दिए। डीएम एसपी मिश्र ने कहा कि वन गायों की समस्या से निजात दिलाने के लिए हर संभव उपाय किए जाएंगे। बैठक में वन विभाग की भूमि में ही कंटीले तार लगाकर कैद करने पर विचार किया गया। एडीएम डा. चंद्रभूषण, एसडीएम सदर एसएन यादव, एसडीएम करहल विजय प्रताप, भाकियू जिलाध्यक्ष तिलक सिंह राजपूत मौजूद थे।
किसानों की प्रमुख मांगें
: वन गायों को गंगा-युमना की तलहटी में छुड़वाने की व्यवस्था हो।
: प्रभावित किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिलाया जाए।
: वन विभाग की खाली जमीन को भूमिहीन ग्रामीणों को आवंटित करें।
: आत्महत्या करने और सदमे से मरने वाले किसानों के आश्रितों का सरकारी नौकरी दी जाए।