राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित कार्यक्रमों में 75 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार द्वारा देय होती है। केंद्र सरकार ने धनराशि देने से मना कर दिया है। इससे यह मामला बीच में अटक गया है। शासन द्वारा पिछड़े विकास खंडों की छात्राओं को सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम से नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कराने के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत मॉडल स्कूलों का निर्माण कराया गया था। इसके तहत जनपद के पिछड़े क्षेत्र करहल व घिरोर में दो स्कूलों का निर्माण कराया गया।
शिक्षा सत्र 2011-12 में जनपद में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत घिरोर विकास खंड के शाहजहांपुर और करहल विकास खंड के सहन में छह करोड़ चार लाख रुपये की धनराशि से दो मॉडल स्कूलों का निर्माण कराया गया था। दिसंबर 2014 में निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया था। शिक्षा सत्र 2015-16 में उसका शुभारंभ किया जाना था। शासन के निर्देश पर इन स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती और फर्नीचर के लिए विज्ञापन जारी किया गया, लेकिन इसी बीच केंद्र सरकार ने अपने हिस्से की 75 प्रतिशत धनराशि जारी करने से मना कर दिया।
प्रदेश सरकार ने अब मॉडल स्कूलों को संचालित करने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का सहारा लेने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शीघ्र ही नए निर्णय के हवाले मॉडल स्कूलों को संचालित कराया जाएगा। फिलहाल जुलाई में मॉडल स्कूलों में शिक्षण कराना संभव नहीं दिख रहा है।
- आरपी यादव, डीआईओएस, मैनपुरी