बेवर। भीषण गर्मी के बीच बेवर की कृषि मंडी में किसानों को मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। मंडी परिसर में किसानों के लिए न तो पर्याप्त छाया की व्यवस्था है और न ही पीने के लिए ठंडा पानी उपलब्ध है। यह स्थिति तब है जब बेवर की मंडी विभाग को करोड़ों रुपये का राजस्व देती है।
दूरदराज से अपनी उपज बेचने आने वाले किसानों को घंटों खुले आसमान के नीचे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पास खड़ा रहना पड़ता है। मंडी परिसर में बनी पानी की टंकी भी केवल शोपीस बनकर रह गई है। किसानों के लिए वाटर कूलर की कोई व्यवस्था नहीं है। पूरे मंडी परिसर में केवल तीन-चार हैंडपंप ही लगे हैं, जो अपर्याप्त हैं। टिन शेड और चबूतरों पर आढ़तियों का कब्जा होने के कारण किसानों को छाया तक नहीं मिल पाती है। मंडी प्रशासन किसानों को पीने का साफ पानी भी मुहैया नहीं करा पा रहा है। मंडी के जिम्मेदारों ने बताया कि वाटर कूलर और किसान विश्राम गृह के निर्माण का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी तक लंबित है।
बेवर की कृषि मंडी हर साल विभाग को करोड़ों रुपये का राजस्व देती है। इसके बावजूद अन्नदाताओं को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
मंडी परिसर में किसानों को किसी प्रकार की सुविधा मुहैया नहीं है। ठंडा पानी और बैठने के लिए कोई समुचित स्थान नहीं है। मंडी परिसर में सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। मनोज कुमार , किसान
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किसान खेतों में तो पसीना बहाता ही है, वही हालात मंडी के भी हैं। गला तर करने के लिए उसे ठंडा पानी भी खरीदकर पीना पड़ता है। मंडी परिसर में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। रमेश चंद्र, किसान
मक्का की उपज को बेचने मंडी आया था। बैठने के लिए छाया की भी व्यवस्था नहीं है । विश्राम स्थल तो बना नहीं है बल्कि किसान के लिए बनाए गए चबूतरों पर भी कब्जा किया जा चुका है। विनय कुमार, किसान
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मंडी में वाटर कूलर और विश्राम स्थल के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव पास होते ही पानी और छांव की व्यवस्था हो जाएगी। गौरव सिंह, मंडी सचिव