फोटो 8 प्राथमिक विद्यालय चनेपुर छबीलेपुर पर बच्चों के साथ शिक्षिका मयंका शर्मा। संवाद
मैनपुरी। बेवर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय चनेपुर, छबीलपुर की प्रधानाध्यापक मयंका शर्मा ने एक जर्जर स्कूल को शिक्षा के केंद्र में बदल दिया है। आज इस विद्यालय में 120 से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो कभी जानवरों को बांधने के लिए इस्तेमाल होता था।वर्ष 2016 में पदभार संभालने पर मयंका शर्मा ने देखा कि स्कूल में जानवर बांधे जाते थे। तब 70 छात्र पंजीकृत थे जिनमें से बहुत कम बच्चे स्कूल आते थे। उन्होंने स्थानांतरण के बजाय स्कूल के कायाकल्प का विकल्प चुना। बिना किसी वित्तीय सहायता के, उन्होंने नवाचारी शिक्षण विधियों से स्कूल की तस्वीर बदल दी। वह बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ तकनीक का ज्ञान भी देती हैं। स्कूल की गतिविधियों के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाते हैं, जिन्हें लाखों लोग देखते हैं। इस वर्ष, पांच ऐसे बच्चों को साइकिलें इनाम में दी गईं जिन्होंने पहली कक्षा से पांचवीं तक एक भी छुट्टी नहीं ली।
सीमित संसाधनों में नवाचार
मयंका शर्मा ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी शिक्षा के स्तर को ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने अपनी तकनीकी और नवाचार का प्रयोग कर बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाई। उनके प्रयासों से न केवल बच्चों की उपस्थिति बढ़ी बल्कि आसपास के लोग भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक हुए। यह स्कूल अब अन्य सरकारी विद्यालयों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है।
प्राथमिक विद्यालय रुद्रपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक सुरजीत सिंह ने भी पेश की नजीर
सरकार की ओर से जो भी सीमित संसाधन प्राप्त हुए हैं उनका और अपने स्तर से अन्य संसाधनों का प्रयोग कर शिक्षा के स्तर को आप सर्वश्रेष्ठ बना सकते हैं। इस बात को साबित किया बेवर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय रुद्रपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक सुरजीत सिंह ने, उन्होंने बताया कि 2014 में उनके यहां तैनाती के समय 21 बच्चों का पंजीकरण था, लेकिन चार से पांच बच्चे ही स्कूल आते थे। स्कूल में बाउंड्री वॉल नहीं थी, पेड़ पौधे नहीं थे, स्थिति बहुत ज्यादा खराब थी। क्षेत्रीय लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया। बच्चों की संख्या बढ़ाई गई। उपस्थिति ज्यादा से ज्यादा की गई। इसके साथ ही बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए हर कक्षा में प्रोजेक्टर लगाए गए। बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम कराए जाते हैं। अब स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 80 से 90 फ़ीसदी रहती है और इसी वजह से खेलकूद से लेकर अन्य प्रतियोगिताओं में हमारे स्कूल के बच्चे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। वहीं अभी हाल ही में स्कूल से एक बच्चा विद्याज्ञान में चयनित हुआ है और एक का नवोदय स्कूल में दाखिला भी हुआ है।
फोटो 8 प्राथमिक विद्यालय चनेपुर छबीलेपुर पर बच्चों के साथ शिक्षिका मयंका शर्मा। संवाद