मैनपुरी। कार और पिकअप चालकों की जल्दबाजी और लापरवाही से दो परिवारों तीन लोग काल के गाल में समा गए। मृतक बेबी और संजय का परिवार पहले ही घर के एक सदस्य की माैत से गमी में था। जैसे ही तीन और लोगों की माैत की खबर गांव पहुंची चीख-पुकार मच गई। उधर, घटनास्थल पर मौजूद लोग यही कह रहे थे कि दोनों वाहनों के चालक की लापरवाही से दो परिवार उजड़ गए।
मैनपुरी के गांव ताबेपुर के रहने वाले संजय अपने जीजा धर्मेंद्र और बहन बेबी के साथ फिरोजाबाद में रहकर मजदूरी करते थे। ताऊ के अंतिम संस्कार में जाते समय उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि रास्ते में दो वाहन मौत बनकर उनकी तरफ आ रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तीनों लोग एक बाइक पर सवार थे। संजय बाइक चला रहे थे, पीछे उनके जीजा और सबसे पीछे बहन बैठी हुई थी।
संजय की बाइक सही दिशा में चल रही थी, इसी बीच सामने से आ रही पिकअप को ओवरटेक करने के लिए कार ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। पिकअप भी तेज रफ्तार दौड़ रही थी। इसी बीच संजय की बाइक के सामने आ गई। संजय ने बाइक को किसी तरह से उससे बचाया से दूसरी तरफ मोड़ा तभी सामने से आ रही पिकअप ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी और तीनों सड़क पर गिर कर मौके पर ही मौत हो गई।
मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने परिजन को सौंपा। रात करीब 8 बजे परिजन अंतिम संस्कार के लिए धमेंद्र और बेबी के शव को फिरोजाबाद और संजय का शव उसके गांव ताबेपुर ले गए। यहां पहले से ही मातम पसरा हुआ था। शव पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। संजय के भाई ने बताया कि उसका अंतिम संस्कार बुधवार को किया जाएगा।
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सड़क पर गिरने के बाद वाहनों ने भी कुचला
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि संजय उनके जीजा और बहन तीनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहन रखा था। जब उनकी पिकअप वाहन से टक्कर हुई तो वह सड़क पर गिर पड़े। लोगों ने बताया कि उनके ऊपर से दोनों वाहन भी निकल गए। अगर वह हेलमेट पहने होते तो शायद उनका सिर में चोट नहीं आती और उनकी जान भी बच सकती थी। शीतला मंदिर से कुछ कदम पहले ही जहां यह हादसा हुआ, उससे महज दो किलोमीटर की दूरी पर ही संजय का गांव ताबेपुर था।
चार बेटी और बेटा पीछे छोड़ गए संजय
संजय की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर उनकी पत्नी रोते हुए बेहोश हो जा रही थीं। जब उन्हें होश आता तो फिर से वह रोने लग रही थीं। कह रही थीं कि अब चार लड़कियों और एक बच्चे की परवरिश कौन करेगा। बड़ी बेटी पायल की एक साल पहले ही शादी हो चुकी है। संजय के जीजा धर्मेंद्र के तीन पुत्र शिवकुमार, अजीत और अरुण हैं, जिसमें एक साल पहले ही शिवकुमार की शादी हुई थी, उसकी शादी में जो पल्सर बाइक मिली थी उसी से वह मैनपुरी आ रहे थे। संजय की मौत के बाद जहां बच्चों के ऊपर से पिता का साया उठ गया, वहीं पत्नी सोनी का भी सिंदूर उजड़ गया।
मां बोली बाइक से आने से किया था मना
मृतक संजय की मां पोस्टमार्टम हाउस पर रोते हुए कह रही थी कि फिरोजाबाद से निकलने से पहले बेटे से बात हुई थी उसने कहा था मैं बाइक से आ रहा हूं। मैंने मना किया बोला कि बस से आ जाओ गर्मी बहुत है परेशान हो जाओगे, लेकिन उसने मेरी एक न सुनी अगर वह बस से आता तो आज जिंदा होता। बेटे की जिद तीन लोगों की जान ले ली।
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