मैनपुरी। शहर के सुनहरे भविष्य की नींव रखते हुए सरकार ने बहु प्रतीक्षित मैनपुरी महायोजना 2031 को अगस्त 2025 में मंजूरी दे दी थी। इससे शहर के अनियोजित विकास पर लगाम लगेगी और 2031 तक एक सुनियोजित और आधुनिक शहर का निर्माण होने की उम्मीद जगी। यह योजना उन शहरवासियों के लिए एक बड़ी राहत है जो दशकों से बुनियादी सुविधाओं की कमी और बेतरतीब निर्माण से जूझ रहे हैं। मगर महायोजना पूरी तरह से सफल बनाने के लिए अभी तक आवश्यक भूमि के अधिग्रहण पर कोई बात नहीं हो रही है। महायोजना केवल एक नक्शा नहीं बल्कि एक विस्तृत रोडमैप है। जो वर्ष 2031 की अनुमानित 3,15,301 की आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। योजना के तहत कुल 2071.73 हेक्टेयर भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए प्रस्तावित है। नई मैनपुरी के लिए पुराने पैटर्न में बदलाव किया गया है। प्रशासन का मानना है कि पिछले दशकों में मैनपुरी का विकास मुख्य रूप से प्रमुख राजमार्गों जैसे आगरा, इटावा, फर्रुखाबाद मार्गों के किनारे हुआ था। इस महायोजना का उद्देश्य इस अनियोजित विस्तार को एक व्यवस्थित रूप देना है। एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, मैनपुरी-भोगांव मार्ग पर प्रस्तावित हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) को हटा दिया गया है। इससे इस भूमि का उपयोग शहर के विकास के लिए किया जा सकेगा।
योजना को धरातल पर उतारना चुनौती
महायोजना की मंजूरी के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इसके कार्यान्वयन की है। शहरवासी और विशेषज्ञ मानते हैं कि यह योजना तभी सफल होगी जब सरकार जमीन का अधिग्रहण करके इसे धरातल पर उतारेगी। योजना के तहत 746.23 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता बताई गई है, जिसका अधिग्रहण एक बड़ा काम होगा। खासतौर पर पार्क, खुले स्थान, औद्योगिक और व्यावसायिक, यातायात और परिवहन, सामुदायिक सुविधाओं के लिए जो भूमि प्रस्तावित की गई है, उसका सरकार को अधिग्रहण कर महायोजना के तहत उस पर योजनानुसार विकास कराना होगा। इन कार्यों के लिए इतनी भूमि प्रस्तावित आवासीय क्षेत्र में 1119.34 हेक्टेयर भूमि को नए आवासीय क्षेत्रों के लिए चिन्हित किया गया है। ताकि बढ़ती आबादी को पर्याप्त और व्यवस्थित आवास मिल सके। व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्र में 111.69 हेक्टेयर व्यावसायिक और 121.83 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि प्रस्तावित है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सामुदायिक सुविधाओं के लिए 183.77 हेक्टेयर भूमि सामुदायिक केंद्रों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित की गई है। हरियाली और पार्क के लिए 208.39 हेक्टेयर भूमि को पार्क और खुले स्थानों के लिए समर्पित किया गया है, जो शहर को हरा-भरा और स्वस्थ बनाने में मदद करेगा। यातायात और परिवहन के लिए 207.04 हेक्टेयर भूमि सड़कों, परिवहन केंद्रों और पार्किंग सुविधाओं के विकास के लिए निर्धारित की गई है।
महायोजना लागू हो चुकी है। अभी जमीन अधिग्रहण के संबंध में कोई पत्राचार नहीं आया है। अभिषेक कुमार सिंह, एसडीएम सदर