फोटो 3 वैरागपुर भूड़नगरिया में खेत में लगे सफेद चंदन के पौधे। संवाद
बेवर। अब खेती किसानी में नित नए प्रयोग करके किसान अपनी पहचान बना रहे हैं। बेवर विकासखंड के गांव वैरागपुर भूड़नगरिया के प्रगतिशील किसान ने परंपरागत खेती आलू, लहसुन, गेहूं, धान से ध्यान हटाकर सफेद चंदन के पेड़ रोपकर नई पहल की है। सफेद चंदन की खेती को देखने के लिए शहर से लोग गांव पहुंच रहे हैं। वैरागपुर भूड़नगरिया के रहने वाले सुदीप राजपूत प्रगतिशील किसान के साथ फार्मासिस्ट का डिप्लोमा भी किए हुए हैं। उनके पास छह बीघा ही खेती योग्य जमीन है। साढ़े तीन बीघा खेत में आलू, लहसुन और गेहूं की खेती करते हैं। ढाई बीघा खेत में सफेद चंदन के 120 पेड़ रोप चुके हैं। उचित देखभाल के चलते यह पेड़ तेजी से फल फूल रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा केचारखी दादरी से वह दो साल पहले सफेद चंदन के पौधे खरीदकर लाए थे। इन पौधों को लाने में 36 हजार रुपये का खर्चा आया था। इसके बाद से इनकी देखभाल में साल में लगभग पांच से सात हजार रुपये का खर्चा आता है। सुदीप ने बताया कि फर्रुखाबाद जिले के मझिगवां के रहने वाले उनके मित्र सुमित शाक्य से सफेद चंदन की खेती करने की प्रेरणा मिली। सुमित 12 बीघा खेत में सफेद चंदन की खेती कर रहे हैं। सुदीप ने बताया कि पहले परिवार वाले तैयार नहीं थे। लेकिन सुमित की बागवानी देखने के बाद उन्होंने सफेद चंदन की खेती के लिए सहमति दे दी।
पौधे रोपने की प्रक्रिया
सफेद चंदन के पौधे 15 फुट की दूरी पर रोपे जाते हैं। पौधे के साथ ही प्लास्टिक की पन्नी में रेड मेंहदी जमीन में रखी जाती है। जो दो साल तक सफेद चंदन के पौधे को भोजन देती हैं। चंदन के पौधे से तीन फुट की दूरी पर कैजुरीना का पौधा रोपा जाता है। यह परिजीवी पौधा होता है। जो दो साल बाद सफेद चंदन के पौधे को अंतिम समय तक भोजन देता है।
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मुनाफे के लिए करना होगा इंतजार
सुदीप बताते हैं कि सरकार की सफेद चंदन की मांग ज्यादा है। इससे तैयार माल की बिक्री में कोई समस्या नहीं आएगी। उन्होंने बताया कि 12 साल में पौधे पककर तैयार हो जाएंगे। सफेद चंदन की लकड़ी छह हजार रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक प्रति किलो के भाव से बिक जाती है। एक पेड़ में 15 से 20 किलो से ज्यादा वजन की लकड़ी प्राप्त हो जाएगी।
जिले में कई प्रगतिशील किसान परंपरागत खेती से हटकर नए प्रयोग कर रहे हैंं। इनमें लागत की अपेक्षा अच्छा मुनाफा भी हाे रहा है। सुदीप की सफेद चंदन की खेती से अन्य किसान भी प्रेरणा ले रहे हैं। विभाग भी प्रगतिशील किसानों की रह संभव मदद कर रहा है।
संजय कुमार मल्ल, प्रभागीय निदेशक