जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल होती जा रही हैं। कई सालों से कैंसर यूनिट बंद पड़ी है जबकि कैंसर के मरीजों की संख्या यहां काफी है। जिला महिला अस्पताल में बनी न्यू बॉर्न बेबी यूनिट अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद कुपोषित बच्चों की संख्या अस्पताल में लगातार बढ़ती जा रही है।
जिले में सर्वाधिक कैंसर रोगियों की संख्या होने के बावजूद अभी तक जिला अस्पताल परिसर में बनी कैंसर यूनिट चिकित्सकों के अभाव में बंद है। कैंसर यूनिट की स्थापना का मकसद कैंसर रोगियों को जिले में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराया जाना था। यूनिट के निर्माण होने के बाद सैफई के चिकित्सकों ने मैनपुरी आने से इंकार कर दिया। कुछ ऐसा ही हाल है जिला महिला चिकित्सालय में न्यू बॉर्न बेबी डिजीज यूनिट का है यहां सात स्टाफ नर्स तैनात हैं लेकिन यूनिट की सेवाएं अभी तक मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सकी हैं।
पोषण वार्ड में सितंबर 2015 से कोई डाक्टर तैनात नहीं है। यहां तैनात न्यूट्रीशियन ही भर्ती होने वाले बच्चों की देखरेख और उपचार दे रही हैं। मार्च में 22 बच्चे कुपोषण से पीड़ित भर्ती किए गए हैं। 55 कुपोषित बच्चों का चेकअप किया गया है। अप्रैल माह में अभी तक 16 कुपोषित बच्चों को पोषण वार्ड में भर्ती किया गया। न्यूट्रीशियन सारिका चौहान ने बताया कि कुपोषित बच्चों को 28 दिन तक अस्पताल में रखा जाता है। अभी तक कुपोषण के चलते भर्ती कराए गए सभी बच्चों को पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की दशा में अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है। वर्ष 2015 में एक बच्ची शिवानी कुपोषण से पीड़ित अस्पताल में भर्ती कराई गई थी। स्वास्थ्य लाभ होने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया था। मगर कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई। जिले में मरीजों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाएं फेल नजर आ रही हैं।
मैनपुरी में बनी कैंसर यूनिट कई सालों से बंद है। यूनिट के बंद होने से कितने मरीज आते हैं इसकी प्रमाणिक जानकारी मेरे पास नहीं है। यूनिट जिला अस्पताल परिसर में बनी हुई है। लेकिन इसमें डाक्टर्स की तैनाती मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। - डा. दुष्यंत त्यागी, सीएमएस