मौसम में बदलाव के साथ ही जिला अस्पताल में पेट दर्द, खांसी, निमोनिया, हार्टअटैक और बुखार से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में विभिन्न रोगों से पीड़ित 700 से अधिक रोगी पहुंचे। अस्पताल पहुंचने वालों में सौ से अधिक रोगी सांस, बुखार और खांसी से पीड़ित थे।
गुरुवार को जिला अस्पताल में सुबह से ही रोगियों की भीड़ पहुंचनी शुरू हो गई। सुबह नौ बजे से ही औषधि वितरण काउंटर पर रोगियों की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। हर रोगी पहले उपचार लेने के लिए प्रयास कर रहा था। दवा वितरण में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कर्मी व्यवस्था संभाले थे। अस्पताल आने वालोें में अधिकांश रोगी सांस, उल्टी दस्त और बुखार से पीड़ित थे। अस्पताल पहुंची रामकुमारी ने बताया कि उन्हें पिछले दो दिन से पेट में दर्द है। इधर-उधर उपचार कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अमर सिंह का कहना था कि निमोनिया होने पर वह अपने पुत्र को दवा दिलाने लाए हैं। एक घंटे का समय पर्चा बनवाने से लेकर दवा लेने में लग गया। अस्पताल में दोपहर दो बजे तक रोगियों की भीड़ लगी रही।
15 दिन में हो चुकी हैं सात की मौतें
मौसम बदलने के साथ ही निमोनिया और पेट दर्द से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। इसके चलते सांस से पीड़ित एक, निमोनिया से एक, पेट दर्द से चार और हार्ट अटैक से एक की मौत हो चुकी है।
यह बरतें सावधानी
- ब्लड प्रेशर वाले मरीज लोग सुबह उठकर न टहलें।
- 45 वर्ष से अधिक के रोगी ब्लड प्रेशर की जांच कराएं।
- सांस फूलने पर कुशल चिकित्सक से ही उपचार कराएं।
- रोगी चिकित्सक की सलाह पर समय से दवा का सेवन करें।
- गर्म कपड़े पहने रहें, ओस से बचें।
क्या कहते हैं चिकित्सक
बर्फीली हवाएं चलने से तापमान में अचानक तीन से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। यह सर्दी बच्चों और 45 साल से अधिक उम्र वालों के लिए अधिक खतरनाक है। इस मौसम में सांस, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग से पीड़ितों की संख्या बढ़ जाती है। वहीं सही समय से जांच कराकर उपचार न लेने से जानलेवा भी हो सकती है।