फोटो 32 किला बजरिया स्थित दुकान पर बिक्री के लिए रखी लकड़ी। संवाद
मैनपुरी। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। एलपीजी व्यवसायिक सिलिंडर नहीं मिलने से होटल और रेस्तरां कारोबार प्रभावित हो रहा है। होटल वालों ने लकड़ी के चूल्हे और भट्टी पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। इससे लकड़ी और कोयले की मांग में बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक महीने में कोयले और लकड़ी मांग 30 से 40 फीसदी बढ़ी है। वहीं कोयले के दाम 15 से 20 रुपये और लकड़ी के दाम में पांच रुपये तक बढ़ गए हैं।शहर में करीब 40 से 45 छोटे बड़े होटल, रेस्तरां और भोजनालय संचालित होते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग शहर में रेहड़ी लगाकर कचौड़ी, छोले-भटूरे, पुलाब, समोसे बेचकर अपना और परिवार का भरण-पोषण करते हैं। युद्ध के कारण देश में एलजीपी गैस किल्लत ने इन लोगों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। व्यवसायिक सिलिंडर नहीं मिलने से होटल और रेस्तरां का संचालन मुश्किल हो गया है। ऐसे में होटल वालों ने अब लकड़े के चूल्हे और भट्टी का सहारा लेना शुरू कर दिया है।होटल और रेस्तरां में चूल्हा और भट्टी के प्रयोग से लकड़ी और कोयले की मांग बढ़ गई है। कारोबारियों ने बताया कि पूर्व के दिनों में आमतौर पर रोज करीब 50 से 60 किलो लकड़ी की बिक्री होती थी। वहीं अब करीब 80 से 90 किलो लकड़ी का कारोबार रोज हो रहा है। वहीं जहां रोज करीब 20 से 30 किलो कोयले की मांग थी, उसमें भी 8 से 10 किलो की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इनके दाम में ज्यादा अंतर नहीं है। पिछले एक महीने में कोयला के दाम 15 से 20 रुपये और लकड़ी के दाम में पांच रुपये तक की बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि सिलिंडर न मिलने से होटल, रेस्तरां और ढाबा संचालकों की समस्या बढ़ गई है। उनके पास कोयला और लकड़ी का ही विकल्प बचा है। लकड़ी विक्रेता शाहिद ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से एलपीजी किल्लत के कारण लकड़ी और कोयले की मांग बढ़ी है। मांग बढ़ने के कारण सूखी लकड़ी के दामों में पांच रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, पत्थर वाला कोयला 20 से बढ़कर 25 रुपये और कच्चा कोयला 45 रुपये से बढ़कर 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
फोटो 32 किला बजरिया स्थित दुकान पर बिक्री के लिए रखी लकड़ी। संवाद