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फॉगिंग के नाम पर केरोसिन का छिड़काव

Thu, 29 Sep 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
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बड़ी फागिंग मशीन सड़कों पर, खत्म होंगे मच्छर - फोटो : rupesh
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डेंगू और चिकनगुनिया की जांच के नाम पर जिले की निजी पैथोलॉजी में जमकर खेल किया जा रहा है। अस्पताल में चिकनगुनिया की जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में निजी पैथोलॉजी पर जांच के नाम पर लूट की जा रही है। वहीं फॉगिंग के नाम पर केवल खानापूरी की जा रही है। दवा के  स्थान पर केरोसिन का छिड़काव हो रहा है। 
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जिले में पहले से ही डेंगू का कहर जारी है, उस पर चिकनगुनिया की भी दहशत है। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने का फायदा उठाकर प्राइवेट पैथोलॉजी मरीजों से जांच के नाम पर खुलेआम लूट कर रही हैं। मरीज निजी चिकित्सकों से जांच लिखाकर सीधे निजी पैथोलॉजी में चिकनगुनिया की जांच कराने पहुंच रहे हैं। स्थिति ये है कि चिकनगुनिया की जांच के नाम पर मरीजों से एक हजार रुपये से लेकर 1200 रुपये तक की वसूली की जा रही है। बुखार की दहशत से परेशान मरीज भी कोई रिस्क लेना नहीं चाहते हैं। वह चिकित्सकों की सलाह पर जांच करा रहे हैं। 
एक पैथोलॉजी संचालक का कहना है कि चिकनगुनिया की जांच के लिए रक्त लेकर आगरा भेजा जाता है। दो-तीन दिन में रिपोर्ट आती है। हालांकि अभी मेरी पैथोलॉजी में चिकनगुनिया की किसी में पुष्टि नहीं हुई।
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जिले में यहां-यहां फैला डेंगू
कस्बा किशनी, एलाऊ सहित शहर में मलिक मील, रघुराजपुरी, खरगजीत नगर में डेंगू के रोगी मिले हैं। 

केस नंबर: एक
खरगजीत नगर निवासी राकेश कुमार का कहना है कि मोहल्ले में डेंगू और मलेरिया फैला हुआ है। अभी तक इस मोहल्ले पांच रोगियों में डेंगू के लक्षण मिल चुके हैं। वहीं अभी तक फॉगिंग नहीं कराई गई है।

केस नंबर: दो
मलिक मील निवासी डॉ. मनोज यादव का कहना है कि अभी तक यहां डेंगू से पीड़ित 13 रोगी निकल चुके हैं, लेकिन मात्र एक बार ही फॉगिंग कराई गई, लेकिन एक भी मच्छर नहीं मरा। कारण फॉगिंग के नाम पर केरोसिन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ये हैं सामान्य लक्षण
- लगातार बुखार का आना और दिन में कई बार शरीर के तापमान में बढ़ोतरी होना।
- शरीर के सभी जोड़ों में दर्द और शरीर में सिहरन रहना।
- सिर दर्द और बदन दर्द के साथ लाल रंग के चकते या निशान पड़ना।
- भूख न लगना और पानी पीते समय गले में जलन का अहसास होना।

ऐसे करें बचाव
- बुखार आने पर सबसे पहले चिकित्सक को दिखाएं। चिकित्सक की सलाह पर ही रक्त जांच कराएं।
- पुष्टि होने पर ही चिकनगुनिया की दवा लें अन्यथा सामान्य पैरासीटामोल से ही राहत मिल जाती है।
- मच्छरदानी का प्रयोग करें। हाथ-पैरों को ढककर रखें।
- मच्छरों के पनपने की संभावना को कम करते हुए आसपास सफाई रखें।

डेंगू की ही तरह यह बीमारी भी एक मच्छर के काटने से ही फैलती है। सामान्य तौर पर बुखार आना, सिर और बदन दर्द होना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं, लेकिन अभी तक अस्पताल में इस बीमारी से पीड़ित कोई भी मरीज सामने नहीं आया है। 
डॉ. धर्मेंद्र, फिजीशियन, जिला अस्पताल

चिकनगुनिया की पुष्टि रक्त जांच से होती है, लेकिन अस्पताल में एलाइजा टेस्ट की कोई सुविधा नहीं है। यदि किसी मरीज में इस बीमारी से संबंधित लक्षण परिलक्षित होते हैं, तो उन्हें आगरा या सैफई के लिए रेफर किया जाता है।
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डॉ. दुष्यंत त्यागी, सीएमएस, जिला अस्पताल
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