शहीद मेला ग्राम विकास किसान प्रदर्शनी बेवर के मंच पर महाकविदेव दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें कवियों ने देशभक्ति, देश के हालातों पर काव्य पाठ प्रस्तुत कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
मुख्य अतिथि कामता सिंह यादव व कवि बदन सिंह मस्ताना समेत सभी कवियों का संयोजक मंडल ने स्वागत किया। मुख्य अतिथि कामता सिंह ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कवि श्रीचंद्र वर्मा चंद्र ने रचना सुनाई, देख गुलामी के मंजर को आजादी ने ली अंगड़ाई, बेवर में थाने के ऊपर विजय पताका फहराई। संदेश चौहान ने कहा आते भूकंप हैं, आते तूफान हैं, बाल मेरे अभी तक क्यों नोंचे गए, रो रही है धरा एक पैगाम ले उसके आंसू अभी तक ना पोंछे गए।
शरद कश्यप ने कहा वतन की आबरू रखना जवानों को सिखा देना, तिरंगा सामने हो तो जरा सिर को झुका देना। ओमप्रकाश वर्मा ओम ने कहा शौर्य गाथाएं सुन जिनकी हर्षित हो मन, उन शहीदों को सौ बार मेरा नमन। युवा कवि संजय तोमर ने कहा जो अब तक बंद थे बक्से में, वो कुर्ते निकाले हैं, शराफत का पहन चोला लगते भोले भाले हैं। संचालन की भूमिका निभा रहे कवि बदन सिंह मस्ताना ने कहा प्राण से प्यारा रहा जिनको वतन है, स्वयं को चाहा नहीं दो गज कफन है। काव्य सम्राट दीन मोहम्मद दीन ने कहा कि पावन माटी देश की हम उसकी संतान, माटी का वंदन करुं जय हो हिंदुस्तान।
इसके अलावा कवि पुरुषोत्तम अटल, शिवम शुक्ला, आलोक भदौरिया अर्श ने भी काव्य पाठ किया। अंत में संयोजक आशिक अली, संजीव यादव ने समस्त कवियों का सम्मान किया। मेला सह संयोजक इंद्रपाल यादव, श्रीकृष्ण गुप्त, कमलप्रताप भदौरिया, राज त्रिपाठी, राजीव गुप्ता, भईयन शुक्ला, श्याम त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।