सहकारी समितियों का 50 करोड़ का लोन लटका
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नोटबंदी का असर जिले की 58 सहकारी समितियों पर भी पड़ा है। किसानों को समितियों द्वारा दिया गया 50 करोड़ का लोन भी अदा नहीं हो पा रहा है। लोन अदा नहीं किए जाने से खाद और बीज की बिक्री भी नहीं हो पा रही है। जिससे समितियों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
जिले की 58 साधन सहकारी समितियां इन दिनों नोटबंदी के दौर से गुजर रही हैं। समितियों से लिए गए लोन को नोटबंदी के चलते किसान अदा नहीं कर पा रहे हैं। समितियों का किसानों पर लगभग 50 करोड़ रुपया बकाया है। केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी से सहकारी समितियों का बजट ही गड़बड़ा गया है। समिति के सचिव द्वारा की जाने वाली वसूली भी नोटबंदी से ही प्रभावित हो चुकी है।
सूत्रों की मानें तो नोटबंदी से पूर्व समिति के सचिव द्वारा की गई लगभग 60 लाख की वसूली भी लटक गई है। किसानों ने वसूली में सचिवों को 500 और 1000 के पुराने नोट ही अदा किए थे। नोटबंदी के बाद अब सहकारी बैंक ने सचिवों द्वारा वसूल किए गए पुराने नोट जमा करने बंद कर दिए हैं। सहकारी बैंक में इस समय लगभग 75 लाख कीमत का बीज रखा हुआ है। नोटबंदी के कारण किसान को बीज की बिक्री नहीं की जा रही है। सहकारी समिति तथा सहकारी बैंक दोनों ही नोटबंदी की समस्या से जूझ रही हैं।
जिले में सक्रिय 58 सहकारी समितियों का लगभग 60 करोड़ का लोन अधर में लटक गया है। नोटबंदी के बाद दी गई सुविधा में भी सहकारी बैंक के साथ भेदभाव किया गया है। नोटबंदी से समितियों पर रखा गेहूं की बीज भी खराब हो जाएगा।
रामकुमार यादव, अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक