देवी रोड स्थित खानकाहे मोहम्मदिया अफजालिया में सालाना उर्स चल रहा है। उर्स के दौरान दरबार ए अफजलिया में हाजिरी लगाकर लोगों ने हर खास ओ आम के लिए दुआ मांगी। वहीं मंगलवार को फैजानिया इस्लामिया स्कूल से चादर निकाल कर चादरपोशी की।
देवी रोड स्थित छोटी खानकाहे मोहम्मदिया अफजालिया में उर्स के चलते बड़ी संख्या में अकीदतमंद, जायरीन और मुरीद पहुंचे हैं। मंगलवार को आगरा रोड स्थित फैजानिया इस्लामिया स्कूल से चादर निकाली गई। यह चादर कव्वालियों के साथ विभिन्न मार्गों से होती हुई छोटी खानकाह पहुंची। चादर को मजार ए मुबारक पर पेश कर मुराद मांगी। कोई फातिहा पढ़ता नजर आया तो कोई दुआ करता। किसी ने कपड़े की चादर पेश की तो किसी ने फूलों की। यहां पर सभी मजहब के लोगों ने दरबार में हाजिरी लगाई। इस दौरान कव्वालों ने दरबार की शान में कव्वाली पेश की। चादर मुनीश भाई मुंबई वालों की ओर से चढ़ाई गई। खानकाह के सज्जादानशीं सूफी हाजी हाशिम जमाल खां, खलीफा वसीम खां, नदीम इलाही, मो. एजाज, मोनिल, मो. यासीन, एहतिशामुद्दीन, अरशद हसन, अली हुसैन, अली अहमद, डा. अशफाक, शाहिद हुसैन आदि मौजूद रहे।
या रब मेरी खोई हुई तकदीर बना दे...
कुरावली के ग्राम दिवरई के निकट हजरत कदम शाह का उर्स शान ओ शौकत के साथ संपन्न हुआ। रविवार की शाम से ही कदम शाह हजरत की मजार पर बाहर से आए कव्वालों ने कलाम पेश किए।
फर्रुखाबाद के कव्वाल मुन्ना मेहरबान ने ‘भर दो झोली, मेरी या मेरे मोहम्मद, लौटकर मैं न जाऊंगा खाली।’ दिल्ली से आए कव्वाल फरीद चिश्ती ने ‘या रब मेरी खोई हुई तकदीर बना दे, मुझमें भी तूने आंख दी मुझे भी मदीना दिखा दे।’ दिल्ली की नाजरा रेशमा ने ‘क्यों आके रो रहा है, मोहम्मद के शहर में, हर दर्द की दवा है मोहम्मद के शहर।’ पेश की। सोमवार की सुबह चार बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। सदर आमिर मुनीरी, जमील वारसी, अता हसन, पूर्व सभासद मोहम्मद अजमेरी फारूकी, मोहम्मद साजिद फारूकी, अबरार, अरमान, हाफिज कारी शमशाद हुसैन, कारी सोनी, हाफिज कारी मुजीब, शानू फारुखी, अली वारिस, मोहम्मद कैफ आदि लोगों का सराहनीय योगदान रहा।