शासन के निर्देश बाद भी सार्वजनिक स्थानों पर गुटका, तंबाकू और शराब की बिक्री पर पाबंदी नहीं लग पा रही है। स्कूल हों या कोचिंग सेंटर, प्रत्येक के सामने गुटका, बीड़ी और तंबाकू की दुकान मिल जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। इसी का नतीजा है कि अधिकांश छात्र गुटका और तंबाकू का सेवन कर रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के अलावा प्रदेश सरकार ने भी धार्मिक स्थल और शिक्षण संस्थाओं के आसपास की 200 मीटर की परिधि में तंबाकू, गुटका, बीड़ी, सिगरेट की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया है। बावजूद इसके प्रशासन इन आदेशों का पालन कराने में नाकामयाब साबित हो रहा है। हैरत की बात यह है कि कानून बनने के बाद से अब तक न तो किसी का चालान हुआ है और न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रधानाचार्य प्रशांत चतुर्वेदी कहते हैं कि केवल दिवस मनाने या भाषण देने से ही तंबाकू के प्रयोग को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए सार्थक पहल जरूरी है। पिता पुत्र से और शिक्षक शिष्य से तंबाकू मंगाने में परहेज नहीं कर रहे, जिसके चलते बच्चे भी तंबाकू की लत का शिकार बन रहे हैं। ऐसे में आखिर कैसे भावी पीढ़ी को तंबाकू के जहर से दूर रखा जा सकता है।
यह होते हैं जहरीले तत्व
जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डा. जेजे राम का कहना है कि धूम्रपान मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। गुटखा और तंबाकू में निकोटिन, टार, मिथाइल एल्कोहल, एसीटोन, फार्मिक एसिड, ब्यूटारिक एसिडि, एसिडिक एसिड, फीनोल जैसे जहरीले तत्व होते हैं, जो शारीरिक अंगों पर हानिकारक दुष्प्रभाव डालते हैं।
गुटका और तंबाकू के दुष्प्रभाव
: मुंह, गले, लीवर, फेफड़े, किडनी में कैंसर होने का खतरा
: रक्त प्रवाह बाधित होने की संभावना
: रक्तचाप बढ़ने का खतरा
: आंखों के लिए हानिकारक
: मुंह के कम खुलने का खतरा