ज्योंति रोड स्थित निरंकारी भवन में रविवार को निरंकारी सत्संग का आयोजन हुआ। इसमें गुरुगद्दी पर विराजमान संत कुसुम ने कहा कि मुक्ति, शक्ति और भक्ति संतों के चरणों से मिला करती है।
संत कुसुम ने कहा कि संतों के वचन जीवन में धारण करने से बदलाव आता है। एक पल का सत्संग परिवर्तन के लिए काफी होता है। ज्ञान का दीपक जले बिना मन में रोशनी नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि सत्य ही वह तप है जो ईश्वर के नजदीक ले जाता है। इससे परमात्मा की निकटता प्राप्त की जा सकती है। धर्म वह होता है जो कर्तव्य का बोध कराता है। गंगा में मिलने वाली सभी नदियां गंगा कहलाती हैं।
संत ने कहा कि व्याधियों का जन्म मोह के कारण होता है। हर इंसान परम लक्ष्य के लिए जागरूक हो, सत्य को पाने के लिए संत की शरण में जाना होगा। संत मंडली में चंद्रपाल ने कहा कि सतगुरु की सेवा सबकी तकदीर बनाती है। संत मंडली में चंद्रपाल, अशोक, जगदीश, शैल कुमारी, सुमित्रा आदि मौजूद थे। अंत में जिला प्रमुख पुष्पा कालरा ने सभी अतिथियों को धन्यवाद दिया।