राजकीय इंटर कालेजों की लाइब्रेरी में अब चुनिंदा लेखकों की किताबें ही मिलेंगी। इसके लिए शिक्षा विभाग ने लेखकाें और किताबों के नाम भी निर्धारित कर दिए हैं। साथ ही कहा है कि तय लेखकों की ही किताबें खरीदी जाएं। किताबों की खरीद में बढ़ती जा रही स्वेच्छाचारिता पर लगाम लगाने के लिए विभाग ने यह निर्णय लिया है।
उप्र माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले भर में 23 राजकीय इंटर कालेज संचालित है। इस बार वार्षिक विद्यालय अनुदान के लिए प्रत्येक राजकीय इंटर कालेज को 50 हजार रुपये की धनराशि जारी की गई है। इस धनराशि में से दस हजार रुपये तक से लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें खरीदी जानी है। किताबों की खरीद फरोख्त में मनमानी न हो इसके लिए किताबें और उनके लेखकों की सूची भी विभाग ने जारी की है। यह किताबें छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रम के अनुरूप ही तैयार की गई है। पुस्तकों की आवश्यकतानुसार एक अथवा दो प्रतियां प्रत्येक विद्यालय के लिए क्रय की जाएंगी।
यह हैं लेखक और उनकी किताबें
ऊषा राय की एडवांस लर्नर, निशा सिंघल की एक्सपर्टाइज इन एसे, विजय गुप्ता की गणितीय सूत्र, कलेक्शन ऑफ एसे ऑफ सेकेंडरी स्टूडेंटस, इंग्लिश हिंदी डिक्शनरी ऑफ साइंस, डाक्टर दिवाकर की राष्ट्रीय प्रतिभा खोज, सीमा श्रीवास्तव की डिक्शनरी ऑफ साइंस, एडिटोरियल कमेटी की मैस्ट्रो इंग्लिश ग्रामर, एक्टिविटी बेस्ड लैंग्वेज स्किल, कंप्रिहेंसिव एसे, कंप्यूक्राफ्ट, कंप्यूटर विज्ञान, उर्मिला गुप्ता की हिस्ट्री टर्मिनोलॉजी, रेनू चंद्रा की कंयूनिकेटिव हिंदी-इंग्लिश ग्रामर, शालिनी की म्यूजिक टेक्नोलॉजी, आरएन राय की इकोनोमिक्स टर्मिनोलॉजी, अशोक गुप्ता की कॉमर्स टेक्नोलॉजी।
प्रधानाचार्यों को दिए निर्देश
जिला विद्यालय निरीक्षक आरपी यादव ने बताया कि इस संबंध में उप्र माध्यमिक शिक्षा अभियान के निदेशक डाक्टर ऋषिकेश भास्कर ने आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुपालन के लिए उन्होंने सभी कालेजों के प्रधानाचार्यों को दिशा निर्देश दिए हैं कि आदेशानुसार ही किताबें खरीदी जाएं।