मैनपुरी। भोले-भाले लोगों को नौकरी दिलाने, मुनाफा कमाने व खाता किराए पर देकर कमीशन देने के लालच में फंसा कर उनके खातों में साइबर ठगी के रुपयों का लेनदेन किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत जनपद में 804 ऐसे खाते चिह्नित किए गए जिनमें किसी न किसी तरीके से साइबर ठगी के रुपये पहुंचे हैं। इसके बाद इन खातों से संबंधित खाता धारकों को पुलिस थाने पर बुलाकर पूछताछ कर खातों का सत्यापन कर रही है। इसमें अब तक 13 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा चुका है।
आपके खातों का प्रयोग साइबर ठग कर रहे हैं। उसमें साइबर ठगी के पैसे का लेनदेन हो रहा है लेकिन खाताधारक को इसके बारे में भनक भी नहीं है। पुलिस ने जब खाताधारक को फोन किया और थाने बुलाया तब उसे पता चला कि उसके खाते में तो साइबर ठगी का रुपया पहुंच गया है। इस मामले में जिले के सैकड़ों लोगों को फंसाया जा चुका है। पुलिस विभाग की ओर से शुरू किए गए अभियान के तहत जनपद के कई थाना क्षेत्र में करीब 804 म्यूल खातों का सत्यापन किया जा रहा है।
जिले में सबसे ज्यादा म्यूल खाते करहल थाने में हैं जिसमें साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किया गया है। करहल क्षेत्राधिकारी अजय सिंह चौहान ने बताया कि थाने में 471 ऐसे खाते चिह्नित किए गए हैं जिनमें साइबर ठगी की रकम आई। इसमें 237 खाते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और 234 खाते बैंक ऑफ इंडिया के हैं। अब तक 108 खातों का सत्यापन किया जा चुका है। इसमें से 6 प्राथमिकी दर्ज कर छह आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा कुर्रा थाना क्षेत्र में 28 खाते चिह्ति किए हैं जिनमें एक में प्राथमिकी दर्ज हुई है और 11 का सत्यापन हो चुका है। बरनाहल थाना क्षेत्र में ऐसे दो खाते चिह्ति हुए हैं जिसमें से एक का सत्यापन हो गया है।
भोगांव थाना क्षेत्र में 333 म्यूल खाते है। साइबर सेल की ओर से संबंधित थाने में भेजी गई सूची के आधार पर संबंधित खाता धारकों को थाने पर बुलाकर उनसे पूछताछ की जा रही है। भोगांव थाना प्रभारी महाराज सिंह भाटी ने बताया कि 333 में से अब तक करीब 200 खाता धारकों से पूछताछ की जा चुकी है, जिनमें से कई लोग ऐसे थे जिन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनके खाते में साइबर ठगी के रुपये आए हैं। वहीं 6 लोग ऐसे भी मिले जो साइबर ठगी में शामिल थे और खाते में आए हुए रुपयों को उन्होंने अन्य कार्यों में खर्च कर लिया। उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया और वहां से जेल भेजा गया।
-
साइबर ठगी के लिए जिन खातों में लेनदेन किया जाता है। उन्हें नेशनल साइबर रिपोर्ट ब्यूरो की ओर से ब्लॉक किया जाता है। इसके बाद संबंधित जनपद में और थाना क्षेत्र में उनका सत्यापन किया जाता है। साइबर ठगी में संलिप्त पाए जाने पर प्राथमिकी पंजीकृत कर कई लोगों को जेल भी भेजा जा चुका है। लोगों को सलाह है कि वह किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने खाते की जानकारी और उसके संचालन की जिम्मेदारी न दें। -अरुण कुमार सिंह, एसपी सिटी