अधिक ड्यूटी, काम का बोझ और परिवार से दूरी पुलिसकर्मियों को तनावग्रस्त कर रही है। थाने-चौकियों में काम करने वाले कई पुलिसकर्मी हाई बीपी और डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। हाल ही में एक पुलिसकर्मी को चिकित्सकों ने गंभीर हालत में रेफर किया है। वहीं कई पुलिसकर्मी बीमारियों से ग्रसित पाए गए थे। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी 10 दिन में एक अवकाश दिए जाने के आदेश भी अभी प्रभावी नहीं हो सके हैं।
काम के बोझ और आपात स्थिति में छुट्टी न मिलने की खीझ कई पुलिसकर्मियों के चेहरों पर साफ देखी जा सकती है। पुलिस अधिकारियों के अलावा इंस्पेक्टर, दरोगा से लेकर सिपाही तक भारी दबाव के बीच अपने काम करते हैं। पर्याप्त आराम न मिलने के कारण अनिद्रा और हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हो रहे हैं।
वहीं परिवार से दूरी उन्हें डिप्रेशन का शिकार बनाती है। अनियमित खानपान होने से मोटापे की समस्या भी पुलिसकर्मियों में देखी जाती है।
वहीं कुछ दिन पूर्व ही चिकित्सकों ने परीक्षण के दौरान 15 पुलिसकर्मी डिप्रेशन और हाईबीपी से ग्रसित पाए गए थे। सही खानपान न होने के चलते करीब 35 मरीज पेट संबंधी रोगों से ग्रसित थे। वहीं पुलिस लाइन अस्पताल में रोजाना करीब 20-22 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
- यह समस्या सिर्फ, इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाहियों तक ही सीमित नहीं है। अधिकारी भी मानसिक दबाव में रखते हैं। काम की अधिकता के साथ तनावग्रस्त माहौल उन्हें और अधिक बीमार बनाता है।
-सतीश चंद्र यादव, रिटायर्ड डीआईजी
- काम के दबाव के बीच अधिकारी और अधीनस्थ दोनों पर राजनीतिक दबाव भी हावी रहता है। जिससे पुलिसकर्मी डिप्रेशन का शिकार होते हैं।
-अशोक कुमार, रिटायर्ड डीआईजी
पुलिस विभाग में डिप्रेशन और हाई बीपी की समस्या एक गंभीर पहलू है। परिवार से दूर रहने की वजह से चिड़चिड़ापन, बात-बात पर गुस्सा आने जैसी प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक हैं। असीमित ड्यूटी मानसिक तौर पर काफी नुकसानदेह हो सकती है। विभागीय प्रक्रिया को सरल करते हुए पुलिसकर्मियों के लिए भी आराम की समय सीमा तय की जानी चाहिए।
डॉ. पीके मांगलिक, मनोचिकित्सक