मैनपुरी। दादरी के गांव बिसाहड़ा की आग पूरी तरह बुझी भी न थी कि शुक्रवार को गोकशी के मचे हल्ले के बाद यहां का करहल कस्बा सुलग उठा। करीब सात घंटे चले बवाल में पहले गोकशी के दो आरोपी फिर उन्हें छुड़ाने गए पुलिसवालों को भीड़ ने पीटा। पथराव हुआ। दर्जन भर वाहन जलाए, तोड़े गए। अल्पसंख्यक दुकानदारों की बहुलता वाली सब्जी मंडी फूंक दी गई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हवा में फायरिंग की तब स्थिति नियंत्रित हो सकी। दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। खुले में खाल उतारने और इसका लाइसेंस न होने पर दोनों आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम में रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। डीएम ने कहा इन पर रासुका भी लगेगा।
बवाल की शुरूआत सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई। बताया गया कि करहल निवासी घनश्याम बीती रात चोरी हुई अपनी गाय को ढूंढते हुए कस्बे से लगे गांव पलोखरा में मंदिर के पास पहुंचे। उन्होंने वहां बंबा की पटरी पर शफीक और लल्ला नामक युवकों को कथित रूप से गोकशी करते देखा। घनश्याम, उनके साथियों व अन्य लोगों ने दोनों युवकों को पीटना शुरू कर दिया। सूचना पर आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें छुड़ाने की कोशिश की तो वे भी नहीं बख्शे गए। किसी तरह पुलिसकर्मी दोनों युवकों को थाने ले गए। इधर पलोखरा, रानीपुर, नानमई, नगरिया आदि में हंगामा करती आक्रोशित भीड़ दोपहर करीब एक बजे जैन इंटर कालेज चौराहे पर पहुंची। यहां गोकशी के खिलाफ नारेबाजी के बीच नगर विकास मंत्री आजम खां पुतला भी फूंका गया। तब तक भारी भीड़ जुट चुकी थी। बल्लू मिस्त्री की दुकान में आगजनी और कई में तोड़फोड़ हुई। मरी गाय को ठेले पर रखकर कस्बे में घुमाया गया।
सीओ करहल सुनील कुमार ने समझाने की कोशिश की तो भड़की भीड़ ने उनकी जीप नहर में धकेल दी और पुलिस की दूसरी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। यहां हुए भारी पथराव के आगे थोड़े से पुलिसकर्मियों को भागना पड़ा। जब तक डीएम चंद्रपाल सिंह, एसपी राकेश शंकर भारी फोर्स के साथ आते हिंसक भीड़ सब्जी मंडी में आग लगा चुकी थी। उग्र भीड़ के बीच फंसे एडीएम सूर्य मणिलाल चंद्र समेत कई अफसरों की भी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ हुई। बमुश्किल उन्हें निकाला गया। इसी बीच वहां पहुंचीं डीआईजी लक्ष्मी सिंह की गाड़ी पर भी पथराव हुआ। एसपी के समझाने के बावजूद फोर्स पर पथराव हुआ तो जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोल दागे और हवाई फायरिंग कर बवालियों को खदेड़ा। पथराव से एसओ कुर्रा समेत लगभग दो दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए। शाम को आईजी डीसी मिश्रा भी करहल पहुंच गए थे। बवाल करने वाले 20 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें नामजद करते हुए अन्य 150 अज्ञात के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई है।
गोकशी नहीं, मरी गाय की
खाल उतार रहे थे : डीएम
जिलाधिकारी चंद्रपाल ने देर शाम आननफानन बुलाई पत्रकार वार्ता में बताया कि यह मामला गोकशी का नहीं है। गाय के पोस्टमार्टम के हवाले से उन्होंने बताया कि वह 24 घंटे पहले मरी थी। इसकी वजह उसका पेट फूलने की बीमारी से ग्रस्त होना था। गोकशी के आरोपी कहे जा रहे दोनों युवकों का पेशा मृत पशुओं की खाल उतारना है लेकिन इसका लाइसेंस वे नहीं दिखा सके। उन्हें खाल उतारता देख वहां पहुंचे लोगों को गोकशी का भ्रम हुआ। अफवाह फैली और गुमराह भीड़ ने अराजकता की। आगरा में डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने भी यही बातें बताईं। उन्होंने कहा कि मृत गाय मुर्दा मवेशी ठेकेदार को बेची गई थी। इसी बीच ‘अमर उजाला’ ने जब संपर्क करने की कोशिश की तो गाय का मालिक बताए गए घनश्याम के घर पर ताला लटका मिला।