पुलिस के खिलाफ गुस्सा, जाम और हंगामा
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अन्य जिलों से ईंटें लाने वालों से दिन-रात वसूली का खेल चलता है। बिना सुविधा शुल्क लिए कोई भी ट्रैक्टर जिले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता है। सूत्रों की मानें तो स्थानीय भट्ठा मालिकों के विरोध के बाद से वसूली के रेट बढ़ गए हैं। संभवत: शुक्रवार सुबह पुलिस और ईंट लाने वाले ट्रैक्टर चालक के बीच विवाद की वजह भी यही रही। हालांकि पुलिस अधिकारी इस बात से इनकार ही करते रहे और विवाद की वजह बैरियर सेे ट्रैक्टर का टकराना बताते रहे।
जिले में बड़ी संख्या में ईंट भट्ठे संचालित हैं। भट्ठा मालिकों के अनुसार आसपास के जिले के भट्ठों से ट्रैक्टर चालक ईंट लेकर आते हैं और यहां से कम दामों पर उन्हें बेचते हैं। साथ ही वो प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं कि अन्य जिले से आने वाली ईंटों पर सीमा पर ही रोक लगाई जाए। इसके बाद भी अन्य जिले से ईंटे लाने का क्रम जारी है। इसका कारण सीमा पर स्थित चौकियों पर दिया जाने वाला सुविधा शुल्क है। सूत्रों की मानें तो भट्ठा संचालकों के दबाव के चलते जिले की सीमा पर स्थित चौकियों में वसूली का रेट भी बढ़ गया है। इसके चलते ईंट लाने वाले ट्रैक्टर चालकों से पुलिस का आए दिन विवाद होता है। शुक्रवार सुबह हुए विवाद की वजह भी यही बताई जा रही है। साथ ही पूरे मामले में कोसमा चौराहे के पास स्थित एक भट्ठा संचालक की भूमिका भी बताई जा रही है। वह भी बाहर से ईंटें लाने वालों का विरोध करता था। हालांकि इस संबंध में जब एसपी से पूछा गया तो उन्होंने ट्रैक्टर चालक और पुलिस के बीच विवाद का कारण ट्रेक्टर के बैरियर से टकराना बताया।
भट्ठा मालिकों ने खोल रखा है मोर्चा
मैनपुरी। पिछले एक पखवाड़े से स्थानीय ईंट भट्ठा मालिकों ने अन्य जिलों से ईंट लाने वालों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। यही नहीं पिछले कई दिनों से भट्ठा मालिक हथियार बंद चेलों के साथ शहर की ओर आने वाले रास्तों पर खड़े हो जाते हैं। इसके बाद बाहर से ईंट लेकर आने वालों को रात भर मारापीटा और धमकाया जाता है। पूरे मामले की जानकारी स्थानीय अधिकारियों को भी है लेकिन मामला सत्ताधारी दल के नेताओं से जुड़ा होने के चलते पुलिस अधिकारी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं।
तो जान से मार देते पुलिसकर्मियों को
मैनपुरी। कोसमा चौकी पर तैनात एक दरोगा और एक सिपाही भीड़ को आक्रोशित होता देख चौराहे पर बनी एक दुकान में जाकर छिप गए। जैसे ही लोगों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने उक्त दुकान का शटर खुलवाया। इसके बाद दोनों की पिटाई शुरू कर दी। जब चौकी के स्टाफ को गुस्साई भीड़ पीट रही थी देखने वालों की रूह कांप गई। दरोगा गिरीश चंद्र और सिपाही संदीप को भीड़ में शामिल लोगों ने ईंटों और पत्थरों से मारा। इससे उनके गंभीर चोट आईं। भीड़ के गुस्से को देख वहां मौजूद सिपाहियों की हिम्मत भी उन्हें बचाने की नहीं हुई। बाद में पहुंचे फोर्स ने उन्हें भीड़ के चंगुल से बचाया। यदि फोर्स समय पर नहीं पहुंचती तो गुस्साई भीड़ ने जान से मारने पर उतारु थी।
ट्रैक्टर के बैरियर से टकराने के बाद ही पुलिस ने चालक को एक दो थप्पड़ मारे थे। इसके डर से ही देवेंद्र और पंकज ट्रेक्टर से कूदकर खेतों की ओर भागे और वहां तालाब में डूबने से उनकी मौत हो गई। पुलिस की पिटाई से मौत की बात सही नहीं है।
- एसपी, देवरंजन वर्मा