मातमी धुनों के साथ रविवार को अलम का जुलूस निकाला गया। हाय हुसैन हम न हुए के नारे लगाए गए। कई लोगों ने इमाम हसन की याद में लुट्टस भी की।
शहर में चांद की सात तारीख को सभी अलम व ताजिए आगरा रोड स्थित इमामबाड़ा में दोपहर दो बजे इकट्ठा हुए। अलम का जुलूस इमामबाड़ा से शुरू हुआ। जुलूस शहर के बड़ा चौराहा, कृष्णा टाकीज, कटरा, घंटाघर आदि मार्गों से होता हुआ इमामबाड़ा पर फातिहा ख्वानी के साथ समापन हो गया। इस दौरान बैंडबाजे मातमी धुनों बजाते और इमाम हसन-हुसैन की शहादत बयां करते चल रहे थे। शहर के लोगों ने जगह-जगह सवील लगाकर अलमदारों को शरबत, खीर आदि तकसीम किया। वहीं अकीदतमंदों ने मुराद पूरी होने पर चांदी व सोने के नीबू, अनार आदि अलमों में बांधे और अपनी-अपनी मुरादें मांगी। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष जमील खां, मोहम्मद एजाज, मोहम्मद आजम खां, सलीम खां, नदीम इलाही, सादाव असलम, सिराज, रवि, वसीम, फैसल आदि मौजूद थे।
करहल में अलम का जूलूस मोहल्ला काजी से शुरू हुआ जो मोहल्ला खेड़ा, सराय, पुराना थाना रोड, सदर बाजार सुभाष गेट, सब्जी मंडी, पडाव बाजार, चूना वाली गली, मोहल्ला कुरैशियान, मनिहारान होता हुआ काजी मोहल्ले में पहुंच कर फातिहा ख्वानी के साथ खत्म हुआ।
बेवर में जुलूस इटावा रोड, फर्रुखाबाद रोड, छिबरामऊ रोड, सदर चौराहा होता हुआ ईदगाह पहुंच कर समाप्त हुआ। इस दौरान युवाओं ने तलवार चलाकर अखाड़ा भी किया। जुलूस में हिदायत अली, कबील, जुलफुकार अली, आशिक अली आदि मौजूद रहे।