श्रावण मास के तीसरे सोमवार को शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए सुबह से देर रात तक शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती रही। शहर के श्री भीमसेन मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर शिवलिंग पर बेल पत्र, धतूरा, प्रसाद चढ़ाकर मनौतियां मानी। प्राचीन चांदेश्वर मंदिर और मां शीतला देवी मंदिर पर भी भक्तों का तांता लगा रहा। पूरे दिन शिव मंदिरों में हर-हर महादेव के स्वर गूंजते रहे।
शहर के विख्यात श्री भीमसेन मंदिर में भगवान शिव का भव्य श्रृंगार देखते ही बन रहा था। सावन के तीसरे सोमवार के लिए मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। भगवान भीमसेन का बाहर से आए कलाकारों ने श्रृंगार किया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर पर पहुंचना शुरू हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कमेटी और पुलिस प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए। प्राचीन चांदेश्वर मंदिर में भी सुबह से देर शाम तक पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। मां शीतला देवी मंदिर, पंजाबी कालोनी स्थित बाबा रघुवीर दास मंदिर, एकरसानंद आश्रम, ऋषि आश्रम, करहल रोड स्थित द्वारिकाधीश मंदिर आदि में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और प्रसाद चढ़ाकर जल अर्पित किया।
सुबह से ही शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु
भोगांव के ऐतिहासिक सोमेश्वरनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। मोहल्ला छोटा बाजार, जगतनगर, आलू मंडी स्थित शिव मंदिरों में भी सैकड़ों महिला पुरुषों ने शिव शंकर की पूजा-अर्चना की।
घर-घर हुई भोलेनाथ की पूजा
बेवर में सुबह से श्रद्धालु हर-हर महादेव के नारे लगाते मंदिरों तथा आश्रमों पर जाते देखे गए। घर-घर में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की गई तथा नगर के पास विदुर आश्रम, गीता आश्रम, किन्नर कड्डी आश्रम, कपिल मुनि आश्रम के पर शिव मंदिरों में भारी भीड़ देखी गई।
श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर की पूजा
करहल में तीसरे सोमवार को अपनी मनोकामना पूर्ण करने एवं भाइयों की सलामती के लिए महिलाओं ने भगवान शंकर की पूजा-अर्चना की। पूरे दिन व्रत रखा। महिलाओं एवं कन्याओं ने आज के दिन भगवान शंकर पर बेल पत्र एवं पुष्प चढ़ाकर भक्तिभाव से पहले घर पर तथा उसके बाद मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की।
मौसम ने खूब दिया साथ
सावन के तीसरे सोमवार पर मौसम ने श्रद्धालुओं का खूब साथ दिया। दिन भर बादलों की छांव और ठंडी हवा और दोपहर में रिमझिम बारिश के बीच सुहावने मौसम में श्रद्धालुओं को शिव मंदिरों तक पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं उठानी पड़ी। शिव भक्तों को मंदिरों पर ही बेल, धतूरा और बेलपत्र आसानी से सुलभ हो गए।