जिले के 123 स्कूलों में बाउंड्रीवाल का निर्माण कार्य रुक गया। कहीं स्कूलों की भवन काफी जर्जर स्थिति में है तो कहीं बाउंड्रीवाल आधी अधूरी लगी हुई है जबकि कुछ स्थानों पर विवाद की स्थिति है। विभाग ने इन स्कूलों को अपनी सूची से बाहर कर दिया है। इन स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं थी ऐसे करीब 141 स्कूलों में विभाग ने निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है। ग्रामीण अंचल में स्थापित प्राइमरी एवं जूनियर स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं होने के कारण छात्र छात्राओं को दिक्कत का सामना करना पड़ता था। शीतलहर में हवाओं के चलने के साथ बेसहारा जानवरों के बैठने के कारण दिक्कत होती थी।
डीएम रवि रंजन के निर्देश पर सीडीओ दीक्षा जैन ने जिले के 264 विद्यालयों का चिह्नांकन कराने के साथ यहां स्कूलों में बाउंड्रीवाल कराए जाने का निर्णय लिया था। लेकिन विभाग ने जब इनकी पड़ताल कराई तो 123 स्कूल ऐसे मिले जहां पर कहीं तो कुछ फीट की बाउंड्रीवाल बनी थी तो कहीं पर बनने के बाद काफी जर्जर हालत में पहुंच गई थी।
इतना ही नहीं कई स्थानों पर विवाद की स्थिति थी। इसके कारण विभाग ने ऐसे स्कूलों में बाउंड्रीवाल बनाने से साफ इन्कार कर दिया है। जिले के 123 स्कूलों में फिलहाल बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं होगा। बल्कि विभाग द्वारा चिह्नांकित 141 स्कूलों में बाउंड्रीवाल बनाए जाने का काम कराया जाएगा। इन स्कूलों को बाद में विभाग चिह्नांकित करके काम कराएगा।
जिले के स्कूलों में बाउंड्रीवाल की स्थिति
- जिले में मनरेगा योजना से बाउंड्रीवाल के लिए चिह्नांकन-264 स्कूल
- जिले में चिह्नांकित स्कूलों में से जहां काम प्रारंभ कराया गया-141 स्कूल
- चिह्नांकित स्कूलों में जहां बाउंड्रीवाल निर्माण पर खर्च होने वाली धनराशि-747.54 लाख
- अभी तक स्कूलों की बाउंड्रीवाल निर्माण का काम हो चुका पूरा-15
प्रभारी डीसी मनरेगा प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि जिले के 141 स्कूलों में बाउंड्रीवाल निर्माण कराए जाने का काम युद्ध स्तर पर संचालित किया जा रहा है। विभाग प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों की बाउंड्रीवाल कराएगा। ताकि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।