जानलेवा हमले के मुकदमे में गवाही के लिए सम्मन तामील होने के बाद कोर्ट में नहीं आना एक दरोगा को भारी पड़ा है। अपर जिला जज गुरुप्रीत सिंह बाबा ने दरोगा की लापरवाही पर गंभीर रुख अपनाते हुए दरोगा के गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। इंसपेक्टर करहल का वेतन रोकने के लिए डीएम, एसपी के साथ कोषाधिकारी को पत्र लिखा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय कर दी है।
थाना करहल के कैलाशपुर निवासी रामऔतार को छह अगस्त 2014 की सायं 7:30 बजे गांव के ही रमेश ने गोली मारकर घायल कर दिया था। रामऔतार ने रमेश तथा उसके भाई शिवराम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की विवेचना करते हुए थाने के दरोगा उदयवीर सिंह ने 11 सितंबर को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। मामले की सुनवाई अपर जिला जज गुरुप्रीत सिंह बाबा की कोर्ट में की गई। कोर्ट से भेेजे गए सम्मन तामील होने तथा कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी दरोगा तारीख पर कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ।
अपर जिला जज ने मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए दरोगा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। लापरवाही बरतने के आरोप में इंस्पेक्टर करहल का वेतन रोकने के आदेश डीएम, एसपी को दिए हैं। वेतन आहरित न हो सके इसके लिए आदेश की कापी कोषाधिकारी को भी भेजी गई है।
इंस्पेक्टर के खिलाफ की टिप्पणी
मैनपुरी। अपर जिला जज गुरुप्रीत सिंह ने गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी दरोगा का कोर्ट में नहीं आने को इंस्पेक्टर की लापरवाही माना है। आदेश में लिखा है कि एसएचओ करहल नहीं जानते हैं कि गैर जमानती वारंट कैसे तामील कराए जाते हैं। इंस्पेक्टर के इस कृत्य को घोर लापरवाही माना गया है।